यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मिले एनडीएमए के सदस्य राजेंद्र सिंह, आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर की चर्चा

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मिले एनडीएमए के सदस्य राजेंद्र सिंह, आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर की चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2024 तक देश को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में नंबर वन बनाने का लक्ष्य दिया है। इसके लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी एनडीएमए तेज गति से काम कर रहा है। प्राकृतिक आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू करने के लिए देश भर में ‘आपदा मित्र’ तैयार करने की योजना शुरू की गई है।

नेशनल डिजॉस्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीएमए) के सदस्य राजेंद्र सिंह ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य में आपदा प्रबंधन और इसकी तैयारियों पर चर्चा की। राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में एनडीएमए की टीम ने एकीकृत राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष और राज्य आपदा प्रबंधन अथॉरिटी (एसडीएमए) का भी दौरा किया।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2024 तक देश को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में नंबर वन बनाने का लक्ष्य दिया है। इसके लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी एनडीएमए तेज गति से काम कर रहा है। प्राकृतिक आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू करने के लिए देश भर में ‘आपदा मित्र’ तैयार करने की योजना शुरू की गई है। एनडीएमए के सदस्य राजेंद्र सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत आपदा मित्रों को 12 से 15 दिन का बचाव एवं राहत कार्य का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। देश के 720 जिलों में से 350 जनपदों में लगभग एक लाख आपदा मित्र तैयार करने की योजना है।

 

तटरक्षक बल के महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्ति के बाद एक बड़ी जिम्मेदारी देते हुए केंद्र सरकार ने राजेंद्र सिंह को एनडीएमए का सदस्य बनाया है। वह इसके बाद से लगातार अलग-अलग राज्यों का दौरा कर आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी मुलाकात की थी। चूंकि उत्तराखंड में भी लगातार आपदाओं को जोखिम बना रहता है, ऐसे में एनडीएमए ने राज्य सरकार के समक्ष आपदा प्रभावितों के लिए 3000 से 5000 की क्षमता वाले शेल्टर बनाने का प्रस्ताव भी रखा था। इस पर राज्य सरकार ने सहमति जताई थी।

 

देहरादून के जौनसार बावर क्षेत्र के गांव बिरमऊ के रहने वाले राजेंद्र सिंह 1980 में तटरक्षक बल में शामिल हुए थे। उनकी प्राथमिक शिक्षा व उच्च शिक्षा मसूरी और देहरादून में हुई थी। कोस्टगार्ड में महानिदेशक के तौर पर अपने कार्यकाल में राजेंद्र सिंह के प्रयासों से ही उत्तराखंड में तटरक्षक भर्ती केंद्र का रास्ता साफ हुआ। उन्होंने सेवानिवृत्ति से पहले इसका शिलान्यास भी करवाया।

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