8 दिसंबर को तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए एक हेलीकॉप्टर हादसे में देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की मौत के मामले की जांच रिपोर्ट आ गई है। जांच दल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को जांच के नतीजों की जानकारी दी गई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वायुसेना ने तीनों सेनाओं की जांच में निकले निष्कर्ष के बारे में रक्षा मंत्री को 45 मिनट का प्रजेंटेशन दिया। इस रिपोर्ट के हवाले से कहा गया कि सीडीएस जनरल बिपिन रावत और पायलट समेत 13 अन्य लोगों को ले जा रहा एमआई17 हेलीकॉप्टर खराब मौसम के चलते हादसे का शिकार हुआ।

समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि उस दिन एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर के पायलट विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान थे और क्रैश से ठीक 8 मिनट पहले उन्होंने कहा था कि वह हेलीकॉप्टर को लैंड करा रहे हैं। वह हेलीकॉप्टर को काफी नीचे उड़ा रहे थे। जमीन से करीब 500-600 मीटर की ऊंचाई पर उस दिन हेलीकॉप्टर के चारों ओर बादलों की मोटी परत थी और इससे विजिबिलिटी काफी कम हो गई थी।
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रिपोर्ट के मुताबिक, विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान रेलवे लाइन को फॉलो करते हुए हेलीकॉप्टर को उड़ा रहे थे और उन्हें वेलिंग्टन में डिफेंस सर्विसेज स्टॉफ कॉलेज में उसे उतरना था। यहां सीडीएस जनरल बिपिन रावत को एक लेक्चर देना था। हेलीकॉप्टर से आखिरी कम्युनिकेशन क्रैश से 8 मिनट पहले रिकॉर्ड किया गया था। मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि जांच रिपोर्ट में किसी तरह की गड़बड़ी या नुकसान की आशंका सिरे से खारिज कर दी गई है।
एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह ने इस हादसे की ‘कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी’ का नेतृत्व किया। तमिलनाडु में कुन्नूर के पास हुई इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले 14 लोगों में जनरल रावत, उनकी पत्नी मधुलिका, उनके रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर एल एस लिद्दर, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के स्टाफ ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह और ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह शामिल थे।


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