Home उत्तराखंड न्यूज़ 130 साल बाद देवता की घर वापसी, छत्रधारी चालदा महासू देवता के आगमन पर उमड़ा जनसमुद्र
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130 साल बाद देवता की घर वापसी, छत्रधारी चालदा महासू देवता के आगमन पर उमड़ा जनसमुद्र

छत्रधारी चालदा महासू देवता लगभग 130 साल बाद गांव पहुंचे तो श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ग्रामीणों ने देवता का भव्य स्वागत किया और सुख-समृद्धि की कामना की। देवता की यह यात्रा अगले पड़ाव भूपोफ गांव के लिए रवाना होगी, जहां परंपरा के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान होंगे।

उत्तराखंड में साहिबा क्षेत्र में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब छत्रधारी चालदा महासू देवता लगभग 130 साल बाद गांव पहुंचे। देवता के आगमन को देखने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या सुबह से ही मंदिर परिसर और मार्गों पर उमड़ पड़ी। गांव के लोग फूल-मालाओं, थाल, ढोल-दमाऊ और पारंपरिक वेशभूषा में देवता का स्वागत करने पहुंचे।

देवता की यह विशेष यात्रा साहिबा प्रवास का हिस्सा है, जो सकस मंदिर से शुरू होकर गांवों में निर्धारित क्रम के अनुसार आगे बढ़ती है। इस बार देवता का पड़ाव बाघी गांव में रहा, जहां मंगलवार रात तक पूजा-अर्चना और अनुष्ठान आयोजित किए गए। इसके बाद बुधवार को देवता को गांव की सीमाओं से भव्य रूप से विदा किया गया, और यात्रा अगले पड़ाव भूपोफ गांव के लिए रवाना हुई।

#MahasuDevta

स्थानीय लोगों ने बताया कि छत्रधारी चालदा महासू देवता की यह यात्रा हर वर्ष होती है, लेकिन गांव में देवता को प्रवेश देने का अवसर लगभग 130 साल बाद मिला है। परंपरा के अनुसार, देवता वहां तभी आते हैं जब परिवारों और ग्राम समुदाय की सहमति, रीति-रीवाज और ज्योतिषीय संकेत अनुकूल हों। इस बार परिस्थितियां अनुकूल रहने के कारण गांव में देवता का आगमन संभव हो पाया। परिवार के मुखिया और स्थानीय निवासी ने बताया कि उनके पूर्वजों के समय भी देवता का स्वागत किया जाता था, लेकिन विभिन्न कारणों से वर्षों तक यह अवसर नहीं मिल पाया। इस ऐतिहासिक क्षण ने गांव में उत्सव जैसा माहौल बना दिया। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में देवता के स्वागत में विशेष नृत्य प्रस्तुत किए, जबकि पुरुषों ने ढोल-दमाऊ की थाप पर पारंपरिक धुनें बजाईं।

ग्रामीणों ने देवता से पूरे क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति, फसलों की उन्नति और परिवारों के कल्याण की कामना की। बच्चों और युवाओं में भी उत्साह देखा गया, क्योंकि उन्होंने पहली बार इस अनोखी परंपरा को अपने गांव में सामने से देखा। कई परिवारों ने अपने घरों के बाहर विशेष दीप सजावट की, ताकि देवता के मार्ग में प्रकाश बना रहे। भूपोफ गांव के लिए जा रही यात्रा को लेकर भी तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। वहां विशेष पूजा, देव गाथाओं का पाठ, अनुष्ठान और जागरण का आयोजन होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवता जहां-जहां गुजरते हैं, वहां प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा और समृद्धि की कामना की जाती है।

गांव में इस पूरे आयोजन ने सामाजिक एकता को भी मजबूत किया है। बुजुर्गों ने बताया कि ऐसी यात्राएं न केवल धार्मिक आस्था को गहरा करती हैं, बल्कि समुदाय के बीच अपनत्व और मेलजोल भी बढ़ाती हैं। 130 साल बाद देवता की गांव वापसी ने साहिबा क्षेत्र में आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को फिर से जीवंत कर दिया है। गांव में उत्साह की यह लहर अगले कई दिनों तक बनी रहने की उम्मीद है।

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