Home उत्तराखंड न्यूज़ ऑपरेशन ‘फेक पिल’ का बड़ा खुलासा: ऑनलाइन बिक रही थीं नामी कंपनियों की नकली दवाएं, STF ने किया गिरोह का भंडाफोड़
उत्तराखंड न्यूज़क्राइमसरोकार

ऑपरेशन ‘फेक पिल’ का बड़ा खुलासा: ऑनलाइन बिक रही थीं नामी कंपनियों की नकली दवाएं, STF ने किया गिरोह का भंडाफोड़

उत्तराखंड एसटीएफ ने ऑनलाइन नकली दवाओं के कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। “ऑपरेशन फेक पिल” के तहत की गई इस कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कोटद्वार और रुड़की में संचालित नकली दवा निर्माण इकाइयों को सील कर दिया गया है। यह गिरोह देश-विदेश की नामी दवा कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं तैयार कर सोशल मीडिया के माध्यम से सस्ते दामों में बेच रहा था।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संभल निवासी जतिन सैनी और मेरठ के खरखौदा निवासी गौरव त्यागी के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ साइबर थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

एसटीएफ को सूचना मिली थी कि फेसबुक पर “एसके हेल्थकेयर” नामक पेज के जरिए बेहद कम कीमतों पर ब्रांडेड दवाओं की बिक्री की जा रही है। शुरुआती जांच में ही यह संदेह गहराया कि कहीं यह नकली दवाओं का नेटवर्क तो नहीं। इसके बाद एसटीएफ ने एक विशेष टीम गठित कर मामले की गहन जांच शुरू की।

जांच के दौरान टीम ने खुद ग्राहक बनकर दवाएं ऑर्डर कीं। ऑनलाइन मंगाई गई दवाओं में सनफार्मा, मैनकाइंड, जाइडस, ग्लेनमार्क जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम वाले 32 बॉक्स शामिल थे। जब इन दवाओं की जांच कराई गई तो सभी नकली पाई गईं।

एसटीएफ के अनुसार ये पार्सल बिहार के गया और उत्तर प्रदेश के वाराणसी से देहरादून भेजे गए थे, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है।

जांच के दौरान एसटीएफ सबसे पहले गौरव त्यागी तक पहुंची। पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। गौरव ने बताया कि उसकी रुड़की में पहले भी एक दवा फैक्टरी थी, जो नकली दवाओं के मामले में पकड़ी जा चुकी है। इसके बावजूद उसने अपने रिश्तेदार मयंक उर्फ मोंटी के साथ मिलकर भगवानपुर क्षेत्र में फिर से नकली दवाओं का निर्माण शुरू कर दिया।

उसने यह भी कबूला कि कोटद्वार सिडकुल क्षेत्र में एक बंद पड़ी फैक्टरी को किराए पर लेकर वहां भी नकली दवाएं बनाई जाती थीं। यह फैक्टरी सामान्य दिनों में बंद रहती थी और केवल ऑर्डर मिलने पर ही खोली जाती थी, ताकि किसी को शक न हो।

पूछताछ में गौरव ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड जतिन सैनी है, जो नकली दवाओं की सप्लाई और ऑनलाइन बिक्री का संचालन करता था।

गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था। आरोपी नामी दवा कंपनियों के पैकेजिंग डिजाइन, लोगो और लेबल की हूबहू नकल कर दवाएं तैयार करते थे। इसके बाद इन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन माध्यमों से बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर बेच दिया जाता था।

विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाएं लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। ऐसी दवाओं में सही मात्रा में दवा तत्व नहीं होते या कई बार हानिकारक रसायनों का उपयोग किया जाता है, जिससे मरीज की हालत बिगड़ सकती है।

एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए रुड़की और कोटद्वार स्थित दोनों फैक्टरियों को सील कर दिया है। मौके से बड़ी मात्रा में नकली दवाएं, पैकेजिंग सामग्री, मशीनें और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।

एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और यह भी जांच की जा रही है कि नकली दवाओं की सप्लाई किन-किन राज्यों में की जा रही थी। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन भुगतान के जरिए हुए लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।

यह मामला केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर अपराध माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन सस्ती दवाओं के लालच में लोग आसानी से ऐसे जाल में फंस जाते हैं। ऐसे में दवा खरीदते समय केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करना चाहिए।

उत्तराखंड एसटीएफ की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ऑनलाइन बाजार में नकली उत्पादों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है और इससे निपटने के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है।

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Hill Mail

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