आयुर्वेद दिवस पर ‘स्थौल्य चिकित्सा एवं नियंत्रण’ विषयक पुस्तक का लोकार्पण

आयुर्वेद दिवस पर ‘स्थौल्य चिकित्सा एवं नियंत्रण’ विषयक पुस्तक का लोकार्पण

‘आयुर्वेद दिवस’ के शुभ अवसर पर वनौषधि विद्यापति, आयुर्वेद गौरव डॉ. मायाराम उनियाल द्वारा आयुर्वेद पर चर्चा तथा आयुर्वेद में वर्णित जटिल रोग स्थाैल्य (मोटापा एवं मेदोवृद्धि) की चिकित्सा एवं नियंत्रण पुस्तक का लोकार्पण दिल्ली विधानसभा उपाध्यक्ष, मोहन सिंह बिष्ट द्वारा किया गया।

डॉ. हेमा उनियाल

नई दिल्ली — ‘आयुर्वेद दिवस’ के शुभ अवसर पर प्रसिद्ध वनौषधि वैज्ञानिक एवं आयुर्वेदाचार्य डॉ. मायाराम उनियाल द्वारा रचित नवीन ग्रंथ ‘आयुर्वेद में वर्णित जटिल रोग स्थौल्य (मोटापा एवं मेदोवृद्धि) की चिकित्सा एवं नियंत्रण’ का भव्य लोकार्पण समारोह 23 सितंबर 2025 को दिल्ली विधानसभा के मीटिंग हॉल में संपन्न हुआ।

इस गरिमामयी अवसर पर दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष, मोहन सिंह बिष्ट ने पुस्तक का लोकार्पण अपने कर-कमलों से किया। कार्यक्रम में अनेक वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ, नीति निर्माता, शिक्षाविद् एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के गणमान्यजन उपस्थित रहे।

ग्रंथ का उद्देश्य एवं महत्व

लोकार्पित पुस्तक में स्थौल्य (Obesity) एवं मेदोवृद्धि जैसे जटिल एवं आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न रोगों के आयुर्वेदिक निदान, उपचार एवं प्रबंधन की विशद जानकारी दी गई है। यह ग्रंथ न केवल चिकित्सकों के लिए उपयोगी है, बल्कि आमजन, शोधार्थियों और स्वास्थ्य के प्रति सजग पाठकों के लिए भी एक अमूल्य संदर्भ सामग्री है।

डॉ. मायाराम उनियाल का परिचय

डॉ. मायाराम उनियाल आयुर्वेद के क्षेत्र में विगत सात दशकों से सक्रिय एक सुप्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य, शोधकर्ता, वैज्ञानिक एवं ग्रंथकार हैं। उन्हें श्रीलंका सरकार द्वारा ‘वनौषधि विद्यापति’, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा ‘धन्वंतरि पुरस्कार’ (₹5 लाख), लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, और महामहिम राष्ट्रपति द्वारा रामनारायण शर्मा राष्ट्रीय आयुर्वेद पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ. उनियाल द्वारा अब तक 450+ शोधपत्र, और 23 से अधिक सचित्र ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें हिमालयी क्षेत्र, वनौषधियां, परंपरागत चिकित्सा पद्धतियां, द्रव्यगुण विज्ञान और पर्यावरण विषयक साहित्य प्रमुख हैं।

दृश्य माध्यम में योगदान

डॉ. मायाराम उनियाल के जीवन एवं कार्यों पर आधारित एक वृत्तचित्र फिल्म का निर्माण भी उनकी पुत्री एवं ग्रंथकार डॉ. हेमा उनियाल द्वारा किया गया है, जिसे शोध एवं शैक्षणिक उपयोग हेतु सराहा जा रहा है।

समारोह की झलक

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने आयुर्वेद में डॉ. उनियाल के योगदान को “जीवित धरोहर” की संज्ञा दी। उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि ‘डॉ. मायाराम उनियाल जैसे व्यक्तित्वों का जीवन समर्पण, शोध और भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण का प्रतीक है। आयुर्वेद के क्षेत्र में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक रहेगा।’

प्रकाशक: प्रवेक कल्प प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा
मुद्रक: लखेड़ा प्रिंटिंग प्रेस, रोहिणी, दिल्ली
पृष्ठ संख्या: 128 | मूल्य: ₹300 | संस्करण: प्रथम (2025)

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