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काण्डा ग्राम पंचायत की शांत वादियों में बसा एक छोटा सा पहाड़ी गांव आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुका है। यह गांव पोखरी विकासखंड के अंतर्गत आता है, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं चुनौतियों के बीच कमल रावत और उनकी पत्नी रेखा देवी ने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प से एक नई कहानी लिखी है।
READ MOREजहां पहाड़ों से पलायन की खबरें अक्सर सुनने को मिलती हैं, वहीं थान बिडोन की यह पहल गांव में ही रोजगार सृजन का सकारात्मक उदाहरण बन गई है। आसपास के गांवों की महिलाएं और युवा भी इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
READ MOREगुच्छी मशरूम, जो प्राकृतिक रूप से हिमालयी क्षेत्रों में सीमित मात्रा में पाया जाता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अत्यंत महंगा बिकता है। इसकी मांग देश-विदेश के होटल उद्योग और औषधीय उपयोगों में लगातार बनी रहती है। किंतु इसकी नियंत्रित और वैज्ञानिक खेती एक बड़ी चुनौती मानी जाती रही है।
READ MORE30 साल पैरा SF में सेवा के बाद कमांडो हीरा सिंह पटवाल अल्मोड़ा के अपने गांव लौटे। बंजर ज़मीन को खेती में बदला, पशुपालन शुरू किया और आत्मनिर्भरता की मिसाल बने। वे युवाओं को गांव लौटने, खेती अपनाने और पहाड़ बचाने का संदेश दे रहे हैं।
READ MOREदिल्ली की नौकरी छोड़ पहाड़ लौटे संदीप पांडेय ने 160 रुपये से HimFla की शुरुआत की। पारंपरिक पिस्यूं लूण से जन्मा यह ब्रांड आज 1.5 करोड़ टर्नओवर के साथ ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आत्मसम्मान दे रहा है। यह कहानी जिद, जड़ों और आत्मनिर्भरता की मिसाल है।
READ MOREप्रो. (डॉ.) महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट ने विज्ञान को समाज और प्रकृति की सेवा का माध्यम बनाया। हिमालय को जीवित तंत्र मानते हुए उन्होंने भूस्खलन, ग्लेशियर, आपदाओं और विकास के प्रभावों पर निर्भीक वैज्ञानिक दृष्टि दी। उनका जीवन सच्चे वैज्ञानिक की मिसाल है।
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काण्डा ग्राम पंचायत की शांत वादियों में बसा एक छोटा सा पहाड़ी गांव आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुका है। यह गांव पोखरी विकासखंड के अंतर्गत आता है, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं चुनौतियों के बीच कमल रावत और उनकी पत्नी रेखा देवी ने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प से एक नई कहानी लिखी है।
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जहां पहाड़ों से पलायन की खबरें अक्सर सुनने को मिलती हैं, वहीं थान बिडोन की यह पहल गांव में ही रोजगार सृजन का सकारात्मक उदाहरण बन गई है। आसपास के गांवों की महिलाएं और युवा भी इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
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