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भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान हाल ही में तब चर्चा का केंद्र बन गए, जब वे 11 गोरखा राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर और अपनी मूल बटालियन 6/11 गोरखा राइफल्स के दौरे के दौरान कर्नल रैंक के बैज पहनकर नजर आए। देश के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी को इस रूप में देखना कई लोगों के लिए आश्चर्य का विषय था, लेकिन भारतीय सेना की परंपराओं को जानने वालों के लिए यह गौरव, अपनत्व और रेजिमेंटल संस्कृति का प्रतीक था।
READ MOREदिल्ली-एनसीआर में बसे प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अपनी मातृभाषा और लोकसंस्कृति को जीवित रखने का एक अनूठा अभियान पिछले 15 वर्षों से लगातार चल रहा है। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के तत्वावधान में गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी भाषाओं की ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाएं हर वर्ष आयोजित की जाती हैं। वर्ष 2012 से शुरू हुई यह पहल आज एक विशाल सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुकी है।
READ MOREउत्तराखंड के पहाड़ों में जैसे ही गर्मियों की धूप तेज होने लगती है और जंगलों में लाल-लाल रसीले काफल पकने लगते हैं, वैसे ही वादियों में एक मधुर आवाज गूंजने लगती है। “काफल पाको… मैं नि चाख्यो…”यह केवल एक पक्षी की आवाज नहीं, बल्कि पहाड़ की लोकसंस्कृति, प्रकृति और भावनाओं से जुड़ी एक जीवंत धुन है। पहाड़ के लोग मानते हैं कि यह चिड़िया स्वयं आकर लोगों को बताती है कि अब जंगलों में काफल पक चुके हैं। इसलिए इसे प्यार से “काफल-पाको चिड़िया” कहा जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे इंडियन कुक्कू कहा जाता है, जिसका वैज्ञानिक नाम कुकुलस माइक्रोप्रोटेरस है।
READ MOREमधुमक्खी सिर्फ शहद नहीं देती, वह हमारे पूरे पर्यावरण की रक्षक है। लगभग 75 प्रतिशत खाद्य फसलों का परागण मधुमक्खियों के माध्यम से होता है। यदि मधुमक्खियां सुरक्षित रहेंगी तो पहाड़, कृषि और जैव विविधता सभी सुरक्षित रहेंगे। हर युवा को मधुमक्खी संरक्षण को पर्यावरण संरक्षण का मिशन बनाना चाहिए।
READ MOREहिमालय, जंगल और नदियों की रक्षा की बात जब भी होगी, तब पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा का नाम श्रद्धा के साथ लिया जाएगा। प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने वाले बहुगुणा ने अपना पूरा जीवन पर्यावरण और मानवता की सेवा में समर्पित कर दिया। उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में लोग उन्हें याद कर रहे हैं और उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प ले रहे हैं।
READ MOREटिहरी की घाटी में मौत से मुकाबला, खेतों में इमरजेंसी लैंडिंग कर टाला बड़ा हादसा, उत्तराखंड की पहाड़ियों में बुधवार सुबह एक बड़ा हवाई हादसा टल गया। बदरीनाथ से दिल्ली लौट रहे छह यात्रियों को लेकर उड़ रहा हेलीकॉप्टर अचानक तेज हवाओं और डाउनड्राफ्ट की चपेट में आ गया। कुछ पल के लिए यात्रियों की सांसें थम गईं, लेकिन पायलट अनुपमा चौधरी की सूझबूझ और साहस ने सभी की जान बचा ली। टिहरी जिले के जौनपुर ब्लॉक के सत्यों-सकलाना क्षेत्र में खेतों के बीच हेलीकॉप्टर की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कर उन्होंने एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया।
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नैनीताल से घूमकर वापस लौट रहे सैलानियों की टवेरा टैक्सी गुरुवार को ज्योलीकोट के नंबर-1 बैंड के पास अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और राहगीरों ने तुरंत पुलिस व एसडीआरएफ को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। समय रहते चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के चलते सभी घायल सैलानियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
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जिले में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए खुले में कूड़ा जलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब ऐसे मामलों में 5 हजार रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही यदि कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था में अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है तो उनकी जवाबदेही भी तय की जाएगी।
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