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उत्तराखंड सरकार ने पीआरडी जवानों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सामान्य ड्यूटी में मृत्यु पर मुआवज़ा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख किया गया है, जबकि अत्यंत संवेदनशील ड्यूटी में मृत्यु होने पर 75 हजार की जगह 1.50 लाख रुपए दिए जाएंगे। CM धामी ने स्थापना दिवस समारोह में इसकी घोषणा की।
READ MOREप्रदेश में राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया नए साल से पूरी तरह ऑनलाइन होने जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आवेदन से लेकर पात्रता जांच, सत्यापन, वितरण और राशन विक्रेताओं के भुगतान तक हर चरण डिजिटल हो। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को विभागीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
READ MOREगोरखपुर के सैनिक स्कूल में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बांटने वाली राजनीति से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग देश को कमजोर करने की साजिश करते हैं। सीएम ने देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत के नाम पर बने भव्य ऑडिटोरियम का उद्घाटन किया और उनकी प्रतिमा का अनावरण करते हुए राष्ट्र सेवा में उनके योगदान को याद किया।
READ MOREदेहरादून के दून अस्पताल में कड़ाके की ठंड के बीच मरीजों को बिना हीटर इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे बुरी हालत जच्चा-बच्चा, ऑर्थो, ईएनटी और कैंसर वार्ड की है, जहां न हीटर है और न ही तीमारदारों के लिए बैठने या ठहरने की जगह। मरीजों को रात भर ठंड में गुजारना पड़ रहा है, जिससे स्थिति और गंभीर हो रही है।
READ MOREहल्द्वानी सहित पूरे उत्तराखंड में पेयजल और सीवर कनेक्शन लेने की व्यवस्था अब पूरी तरह ऑनलाइन होने जा रही है। उपभोक्ताओं को किसी विभाग में चक्कर नहीं लगाने होंगे। जल संस्थान और नगर निगम मिलकर नया प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे हैं, जिसमें आवेदन, दस्तावेज अपलोड, वेरिफिकेशन और मंजूरी सब कुछ घर बैठे होगा, जिससे लाखों लोगों को राहत मिलेगी।
READ MOREसाकुरा कॉर्पोरेट सॉल्यूशंस के संस्थापक रमेश शर्मा सुन्द्रीयाल और शुभम सुन्द्रीयाल के नेतृत्व में भारत–जापान टैलेंट सहयोग को नई उड़ान मिली है। कंपनी ने IIT के 35 युवाओं को जापान में प्रतिष्ठित कंपनियों में प्लेस किया है और दिसंबर में दूसरी खेप भी रवाना कर दी गई। भाषा प्रशिक्षण से लेकर ओरिएंटेशन तक, यह पहल भारत के युवाओं के लिए नया वैश्विक अवसर खोल रही है।
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उत्तराखंड की नदियाँ अवैध खनन के कारण भीतर से खोखली होती जा रही हैं। नदी तल से छेड़छाड़ ने बाढ़, भूस्खलन और गाँवों की असुरक्षा को बढ़ा दिया है। केदारनाथ से जोशीमठ तक की आपदाएँ चेतावनी हैं कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश भविष्य को संकट में डाल रहा है।
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लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा के लिए तीन सितारा रैंक शक्ति नहीं, जिम्मेदारी है। असम राइफल्स के डीजी के रूप में उन्होंने सुरक्षा को मानवीय और भरोसेमंद बनाया। आतंकवाद-रोधी अभियानों में उनका नेतृत्व संतुलन, संवाद और विश्वास पर आधारित रहा, जिसने सैनिकों और नागरिकों दोनों का भरोसा जीता।
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