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देहरादून की पहाड़ियों में अब एक नई कहानी लिखी जा रही है साहस, आत्मनिर्भरता और आर्थिक आज़ादी की। जहां कभी महिलाएँ सिर्फ़ घर की ज़िम्मेदारियों तक सीमित थीं, अब वही महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ बनकर पूरे ज़िले की किस्मत बदलने निकल पड़ी हैं।
READ MOREऋषिकेश में पिछले कुछ दिनों से हाथियों की लगातार आवाजाही के बीच वन विभाग ने हवाई निगरानी और ड्रोन से मॉनिटरिंग का दावा तो किया, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट रही। एक मासूम बच्चे की जान हाथी के हमले में चली गई। ग्रामीण क्षेत्रों में डर और गुस्सा बढ़ रहा है क्योंकि ड्रोन से निगरानी के दावे सिर्फ कागज़ों में ही साबित हो रहे हैं।
READ MOREउत्तराखंड में वर्ष 2003 की मतदाता सूची की सीटों से नाम खोज पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। परिसीमन के बाद 2008 में 18 विधानसभा सीटें समाप्त या नए नामों में बदल गईं। एसएसआर अभियान के तहत आयोग ने मतदाताओं को पुराने नाम से ही नाम खोजने की सलाह दी है। स्थिति यह है कि पुराने नाम तो उपलब्ध हैं, पर सीटें अब मौजूद ही नहीं।
READ MOREउत्तराखंड में लोगों को छोटी-छोटी जमा योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का लालच देकर ठगने वाले एलयूसीसी घोटाले में बड़ा एक्शन हुआ है। सीबीआई ने कंपनी के ब्रांड एम्बेसडर सहित 46 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है। राज्य में 35 शाखाओं के जरिए हजारों निवेशकों से जमा कराई गई रकम को कथित रूप से ठगी में इस्तेमाल किया गया।
READ MOREउत्तराखंड सरकार ने एआई मिशन-2025 की दो अहम नीतियों एआई पॉलिसी और डेटा शेयरिंग पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इसका उद्देश्य तकनीक को पहाड़ों की जरूरतों के अनुसार ढालना और प्रदेश को आधुनिक डिजिटल भविष्य से जोड़ना है। राज्यपाल के निर्देशन में जारी इन नीतियों से डेटा साझा करना आसान होगा, शोध को बढ़ावा मिलेगा और एआई आधारित समाधान पहाड़ी जीवन को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होंगे।
READ MOREदिवाकर भट्ट सिर्फ एक नेता नहीं थे, वे उत्तराखंड आंदोलन की धड़कन थे। 1994 से लेकर राज्य बनने तक हर मोर्चे पर उनका चेहरा जिद, साहस और जनता की बेबसी के बीच खड़ा दिखा। भीड़, लाठीचार्ज, गिरफ्तारी, गोली का आदेश सबका सामना करते हुए उन्होंने पहाड़ की आवाज़ दिल्ली तक पहुंचाई। UKD के माध्यम से उन्होंने पहाड़ की राजनीति को नई पहचान दी। उनका जाना पहाड़ की अस्मिता का सबसे बड़ा नुकसान है।
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उत्तराखंड की नदियाँ अवैध खनन के कारण भीतर से खोखली होती जा रही हैं। नदी तल से छेड़छाड़ ने बाढ़, भूस्खलन और गाँवों की असुरक्षा को बढ़ा दिया है। केदारनाथ से जोशीमठ तक की आपदाएँ चेतावनी हैं कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश भविष्य को संकट में डाल रहा है।
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लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा के लिए तीन सितारा रैंक शक्ति नहीं, जिम्मेदारी है। असम राइफल्स के डीजी के रूप में उन्होंने सुरक्षा को मानवीय और भरोसेमंद बनाया। आतंकवाद-रोधी अभियानों में उनका नेतृत्व संतुलन, संवाद और विश्वास पर आधारित रहा, जिसने सैनिकों और नागरिकों दोनों का भरोसा जीता।
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