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एनडीएमए के सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल ने डीएमआरआर के लिए सामाजिक तैयारियों के साथ विज्ञान को जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर प्रधानमंत्री के नौ सूत्रीय एजेंडा के अनुरूप शैक्षणिक संस्थानों का एक सशक्त नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
READ MOREसीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल वर्दीधारी अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सामरिक सोच को जन-जन तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति व्यापक जन-जागरूकता विकसित हो सके।
READ MOREउत्तराखंड की देवभूमि में अलकनंदा नदी के किनारे विराजमान माँ धारी देवी का मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोकआस्था की धड़कन है। पहाड़ों की शांति और नदी की कलकल ध्वनि के बीच स्थित यह स्थान श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति कराता है।
READ MOREअसम राइफल्स अपने मूल सुरक्षा दायित्वों से आगे बढ़कर युवा सशक्तिकरण, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकीकरण को सक्रिय रूप से बढ़ावा देता रहा है। यूनिटी उत्सव 2.0 ने खेल, संस्कृति और सार्थक युवा सहभागिता के माध्यम से ‘वन नेशन, वन ड्रीम’ की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक मील का पत्थर स्थापित किया।
READ MOREचीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान की सास यशोदा देवी नेगी का निधन हो गया है। सास के निधन की सूचना पर सीडीएस दिल्ली से कोटद्वार पहुंचे। यहां लालपुर स्थित अपनी ससुराल में उन्हाेंने सास यशोदा देवी के अंतिम दर्शन किए।
READ MOREआगामी चारधाम यात्रा 2026 के सफल, सुव्यवस्थित और सुरक्षित संचालन के लिए सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी उत्तरकाशी प्रशांत कुमार आर्य, जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग प्रतीक जैन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (UTDB) बीएल राणा तथा उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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उत्तराखंड में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए आज से ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य के पर्यटन विभाग ने यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। श्रद्धालु सुबह 7 बजे से आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।
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गढ़वाल और कुमाऊँ में होली का उल्लास अपने चरम पर पहुँच चुका है। वास्तविक होली से एक दिन पहले ही पहाड़ के गाँवों में उत्सव का रंग साफ दिखाई दे रहा है। शाम ढलते ही चौपालों और मंदिर प्रांगणों में लोग एकत्रित हो रहे हैं और बैठक होली की मधुर स्वर लहरियाँ गूंज रही हैं। ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की संगत में पारंपरिक होली गीत गाए जा रहे हैं।
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