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उत्तराखंड में वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए रिज़ॉर्ट की तर्ज पर नेचुरोपैथी अस्पताल खोले जाएंगे। इन अस्पतालों में बिना दवाइयों के प्राकृतिक तरीकों से इलाज होगा। पहले चरण में चंपावत, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में अस्पताल खोलने की तैयारी है।
READ MOREउत्तराखंड के एक दूरस्थ गांव में सड़क निर्माण की स्वीकृति के बावजूद आज तक सड़क नहीं बन पाई। नतीजा यह है कि बीमार मरीजों को पांच किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। यह घटना पहाड़ी इलाकों में विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है।
READ MOREउत्तराखंड में राशनकार्ड धारकों के लिए बड़ी राहत—अब 54 लाख लोग मोबाइल ऐप से घर बैठे ई-केवाईसी कर सकेंगे। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने नई तकनीक शुरू की है, जिससे राशन डीलर की दुकानों पर लगने वाली भारी भीड़ खत्म होगी और आइरिस स्कैन से पहचान तुरंत संभव हो जाएगी।
READ MOREहल्द्वानी सहित पूरे उत्तराखंड में पेयजल और सीवर कनेक्शन लेने की व्यवस्था अब पूरी तरह ऑनलाइन होने जा रही है। उपभोक्ताओं को किसी विभाग में चक्कर नहीं लगाने होंगे। जल संस्थान और नगर निगम मिलकर नया प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे हैं, जिसमें आवेदन, दस्तावेज अपलोड, वेरिफिकेशन और मंजूरी सब कुछ घर बैठे होगा, जिससे लाखों लोगों को राहत मिलेगी।
READ MOREउत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग के सचिव दीपक कुमार ने आज अल्मोड़ा जिले का दौरा कर जिले में संचालित विभिन्न योजनाओं, नवाचारों एवं कार्यक्रमों की समीक्षा की। यह बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई, जिसमें उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया।
READ MOREएसकेपी प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित सिल्वर जुबली समारोह न केवल कंपनी की विकास यात्रा, मूल्यों और विरासत का प्रतीक था, बल्कि यह वर्षों की मेहनत, समर्पण और सफलता का उत्सव भी था। यह आयोजन कंपनी के संस्थापक एवं चेयरमैन सुरेश चंद्र पांडे और उनकी टीम के विश्वास, उत्कृष्टता एवं नवाचार की एक प्रेरणादायक कहानी को सम्मानित करने वाला एक यादगार अवसर है।
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सांस्कृतिक संस्था पर्वतीय कला केंद्र द्वारा संस्था के संस्थापक तथा रंगमंच जगत के सुप्रसिद्ध संगीतकार स्व. मोहन उप्रेती के 98वें जन्मदिवस पर संस्था की 58 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित स्मारिका का लोकार्पण तथा उनके द्वारा गीत-नाट्यों और नाटकों का प्रभावशाली एवं मनमोहक मंचन किया गया।
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ऐपण बचपन से उनके जीवन का हिस्सा रहा है। त्योहारों, पूजा-अनुष्ठानों और पारिवारिक आयोजनों में घर की महिलाओं को पारंपरिक लाल गेरू और चावल के घोल से सुंदर आकृतियां बनाते देख उन्होंने इस कला को सीखा। समय के साथ उन्होंने इसे केवल पारंपरिक आंगन और चौकी तक सीमित न रखकर कैनवास, लकड़ी की प्लेट, दीवार सज्जा, उपहार सामग्री और कॉर्पोरेट गिफ्ट आइटम्स तक विस्तार दिया।
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