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उत्तराखंड सरकार ने पीआरडी जवानों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सामान्य ड्यूटी में मृत्यु पर मुआवज़ा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख किया गया है, जबकि अत्यंत संवेदनशील ड्यूटी में मृत्यु होने पर 75 हजार की जगह 1.50 लाख रुपए दिए जाएंगे। CM धामी ने स्थापना दिवस समारोह में इसकी घोषणा की।
READ MOREहल्द्वानी सहित पूरे उत्तराखंड में पेयजल और सीवर कनेक्शन लेने की व्यवस्था अब पूरी तरह ऑनलाइन होने जा रही है। उपभोक्ताओं को किसी विभाग में चक्कर नहीं लगाने होंगे। जल संस्थान और नगर निगम मिलकर नया प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे हैं, जिसमें आवेदन, दस्तावेज अपलोड, वेरिफिकेशन और मंजूरी सब कुछ घर बैठे होगा, जिससे लाखों लोगों को राहत मिलेगी।
READ MOREबदरीनाथ धाम की यात्रा के दौरान सफाई की चाक चौबंध व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बनी रहती थी। वहीं नगर पंचायत बदरीनाथ ने धाम में होने वाले कूड़े को समृद्धि का आधार बना लिया है। यहां नगर पंचायत की ओर से कूड़े का विपणन कर 8 लाख से अधिक की आय अर्जित की है। जो अब जनपद की अन्य नगर पालिकाओं और पंचायतों के लिए भी मॉडल के रूप में स्थापित हो गया है।
READ MOREउत्तराखंड में इस समय जंगली जानवरों का आतंक फैला हुआ है। सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। कल ही भालू ने एक महिला को गंभीर रूप से घायल कर दिया था आज रामेश्वरी देवी को प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति गंभीर होने पर उन्हें हेलीकॉप्टर से ऋषिकेश एम्स रेफर किया गया।
READ MOREउत्तराखंड के सीमांत चमोली जिले की नीती घाटी एक बार फिर खतरे की जद में है। धौली गंगा नदी में झील बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, और यही झील अब भविष्य की एक बड़ी आपदा का संकेत मानी जा रही है।
READ MOREविश्व धरोहर स्थल फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान आज से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। हर साल की तरह इस वर्ष भी घाटी 1 जून को पर्यटकों के लिए खोली गई थी और 31 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से बंद कर दी गई।
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चारधाम यात्रा को लेकर राज्य सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। 22 अप्रैल से केदारनाथ धाम की यात्रा प्रारंभ हो जाएगी। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार घोड़ा-खच्चरों का डिजिटल डाटा तैयार किया जा रहा है, ताकि यात्रा पर आने वाले यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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काण्डा ग्राम पंचायत की शांत वादियों में बसा एक छोटा सा पहाड़ी गांव आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुका है। यह गांव पोखरी विकासखंड के अंतर्गत आता है, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं चुनौतियों के बीच कमल रावत और उनकी पत्नी रेखा देवी ने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प से एक नई कहानी लिखी है।
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