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सनातन का मूल आग्रह आचरण पर है, पहचान पर नहीं। धर्म (कर्तव्य), अहिंसा, करुणा, संयम, ये मूल्य किसी एक समुदाय की बपौती नहीं। जब सनातन को संकीर्ण पहचान में कैद किया जाता है, तब वह अपने ही मूल से कट जाता है।
READ MOREमाधो सिंह भंडारी ने पहाड़ काटकर नहर निर्माण का संकल्प लिया—एक ऐसा कार्य जिसे उस समय लोग असंभव मानते थे। 17वीं शताब्दी में उन्होंने इस नहर का निर्माण करवाया। इस परियोजना के अंतर्गत कठोर चट्टानों को काटकर लगभग 600 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई, जो उस युग की अद्भुत इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाती है। लोककथाओं के अनुसार, देवी को प्रसन्न करने और नहर के सफल निर्माण के लिए उन्होंने अपने पुत्र की बलि दी थी।
READ MOREश्रीनगर गढ़वाल के बाल्मीकि चौक (पीपलचौरी), श्रीनगर गढ़वाल के पास रहने वाले हरीश पंवार आज स्वरोजगार की एक प्रेरक कहानी बन चुके हैं। जिस उम्र में अधिकतर युवा नौकरी की तलाश में भटकते नजर आते हैं, उसी उम्र में हरीश ने मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि दर्जनभर से अधिक गांवों और 50 से ज्यादा परिवारों के लिए रोज़गार का सहारा भी बने हैं।
READ MOREआज के भारत में नीति विशेषज्ञों की कमी नहीं है, लेकिन ऐसे लोग बहुत कम हैं जो नीति को फाइलों से निकालकर समाज की ज़मीन तक उतार सकें। शौर्य डोभाल इसी दुर्लभ श्रेणी में आते हैं। उन्होंने नीति को सत्ता का उपकरण नहीं, समाज परिवर्तन का माध्यम बनाया है।
READ MOREदेवप्रयाग विकासखंड के भ्वींट गांव से निकले बलवंत सिंह रावत की सफलता केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ और उसके युवाओं की सामूहिक उम्मीद की जीत है। ऐसे समय में जब संसाधनों की कमी, बेरोज़गारी और पलायन पहाड़ी समाज की सबसे बड़ी चुनौतियां बन चुकी हैं, बलवंत सिंह रावत की कहानी यह साबित करती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, यदि संकल्प अडिग हो तो रास्ते स्वयं बन जाते हैं।
READ MOREउत्तराखंड के एक दूरस्थ गांव में सड़क निर्माण की स्वीकृति के बावजूद आज तक सड़क नहीं बन पाई। नतीजा यह है कि बीमार मरीजों को पांच किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। यह घटना पहाड़ी इलाकों में विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है।
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गढ़वाल और कुमाऊँ में होली का उल्लास अपने चरम पर पहुँच चुका है। वास्तविक होली से एक दिन पहले ही पहाड़ के गाँवों में उत्सव का रंग साफ दिखाई दे रहा है। शाम ढलते ही चौपालों और मंदिर प्रांगणों में लोग एकत्रित हो रहे हैं और बैठक होली की मधुर स्वर लहरियाँ गूंज रही हैं। ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की संगत में पारंपरिक होली गीत गाए जा रहे हैं।
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हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (एचएनबीजीयू) का 12वां दीक्षांत समारोह 24 मार्च 2026 को आयोजित किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह भव्य समारोह विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमथन ऑडिटोरियम में संपन्न होगा।
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