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उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में आई हालिया आपदा ने एक बार फिर 12 साल पहले केदारनाथ में वर्ष 2013 में हुए भीषण जलप्रलय की भयावह यादें ताजा कर दी हैं।
READ MOREउत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में आई प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। विशेष रूप से हर्षिल और गंगोत्री क्षेत्र में फंसे तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन, सुरक्षा बलों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने तीव्र गति से कार्य किया है।
READ MOREउत्तरकाशी जिले के आपदा-ग्रस्त धराली गांव में केंद्र और राज्य सरकारों ने राहत एवं बचाव अभियान को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं के बाद क्षेत्र में सेना, बीआरओ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन सहित सभी एजेंसियां राहत कार्यों में सक्रिय रूप से लगी हैं।
READ MOREहिमालय विश्व की सबसे युवा और सबसे संवेदनशील पर्वतमालाओं में से एक है। इसकी भूगर्भीय संरचना अस्थिर है, और यहां की पास्थितिकी अत्यंत नाजुक संतुलन पर टिकी है। बदलते वैश्विक मौसम, जलवायु परिवर्तन और लगातार हो रहे अनियंत्रित मानवीय हस्तक्षेप इस संतुलन को खतरनाक रूप से बिगाड़ रहे हैं।
READ MOREउत्तरकाशी के हर्षिल क्षेत्र के धराली गांव में मंगलवार को बादल फटने की भयावह घटना सामने आई है। धराली के खीर गंगा क्षेत्र में अचानक आए तेज़ पानी और मलबे के सैलाब से गांव में भारी तबाही मच गई। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोगों के लापता होने का अनुमान है।
READ MOREबारिश और भूस्खलन के कारण कई स्थानों पर सड़कें धंसी
ग्रामीणों ने प्रशासन से क्षेत्र का भ्रामण कर उचित मुआवजे देने की मांग की



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हिमालय की गोद में बहने वाली सदानीरी नदियाँ माँ गंगा और माँ यमुना आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही हैं। उत्तरकाशी जिले में इन आस्था की नदियों में हो रहे अवैध और अवैज्ञानिक खनन ने न केवल नदियों के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि पूरे पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्र को भी अस्थिर कर दिया है।
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कोटद्वार क्षेत्र में लंबे समय से दहशत फैलाने वाला गुलदार आखिरकार वन विभाग की कार्रवाई में पिंजरे में कैद हो गया। गुलदार ने महिलाओं और मवेशियों पर हमले किए थे। ट्रैंकुलाइज कर उसे रेस्क्यू सेंटर भेजा गया, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
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