“सिकंदर नहीं… जनरल बिपिन रावत जैसे योद्धा ही महान होते हैं”: योगी आदित्यनाथ

“सिकंदर नहीं… जनरल बिपिन रावत जैसे योद्धा ही महान होते हैं”: योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर के सैनिक स्कूल में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बांटने वाली राजनीति से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग देश को कमजोर करने की साजिश करते हैं। सीएम ने देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत के नाम पर बने भव्य ऑडिटोरियम का उद्घाटन किया और उनकी प्रतिमा का अनावरण करते हुए राष्ट्र सेवा में उनके योगदान को याद किया।

सैनिक स्कूल गोरखपुर के विशाल प्रांगण में 9 दिसंबर का माहौल बिल्कुल अलग था भावनाओं से भरा हुआ, राष्ट्रीय गौरव से सजा हुआ। मंच पर खड़े होकर मुख्यमंत्री ने समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा की राजनीति में उलझाने वालों पर कड़ा प्रहार किया। उनका कहना था कि ऐसे लोग वही गलती दोहराते हैं जो इतिहास में जयचंद और मीरजाफर ने की थी अपनी महत्वाकांक्षाओं के लिए देश को कमजोर करना। उन्होंने यह भी साफ किया कि जब ऐसे लोग सत्ता में आते हैं, तो उनके फैसले राष्ट्रहित में नहीं, बल्कि परिवारहित में होते हैं वे देश नहीं, अपनी संपत्ति, विदेशों में होटल और द्वीप बनाते हैं। देश के लिए असली विकास तब संभव है, जब समाज में भेदभाव नहीं, बल्कि एकता, कर्तव्य, और राष्ट्रभक्ति का भाव हो। और ठीक इसी संदर्भ में आज का दिन और भी खास हो गया क्योंकि मंच का केंद्रबिंदु थे देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, जनरल बिपिन रावत

समाज को बाँटने वालों से सावधान, देश को जोड़ने वालों को सलाम
गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से साफ कहा: जाति, क्षेत्र, भाषा के नाम पर समाज को तोड़ने वाले… वही लोग हैं जो सत्ता में आकर सिर्फ अपना घर भरते हैं। उनके अनुसार, असली राष्ट्रनिर्माता वे लोग होते हैं, जो देश को जोड़ते हैं, जैसे जनरल बिपिन रावत।

गोरखपुर सैनिक स्कूल में ‘बिपिन रावत ऑडिटोरियम’,विरासत को समर्पित अभूतपूर्व सम्मान
योगी आदित्यनाथ ने सैनिक स्कूल गोरखपुर में एक हज़ार से अधिक क्षमता वाले “जनरल बिपिन रावत ऑडिटोरियम” का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कहा “यह ऑडिटोरियम सिर्फ एक इमारत नहीं… ये जनरल रावत की राष्ट्रसेवा का जीवंत प्रतीक है।”

इसी मंच पर

  • जनरल रावत की प्रतिमा का अनावरण हुआ

  • उनके जीवन पर आधारित पुस्तिका का विमोचन हुआ

  • और उनकी चौथी पुण्यतिथि पर पूरा परिसर उन्हें सलाम करता दिखा

 

बिपिन रावत—वो योद्धा जिसने पंच प्रण को जीवनशैली बनाया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए पंच प्रण का उल्लेख करते हुए योगी ने कहा कि जनरल रावत सिर्फ एक सैनिक नहीं थे… वो उन मूल्यों का जीवंत रूप थे, जिन पर महान भारत की नींव टिकती है। साथ ही उन्होंने कहा “जनरल रावत विपरीत परिस्थितियों में भी सिर्फ कर्तव्य निभाते थे, परिणाम की चिंता किए बिना। यही असली भारतीयता है।”

विदेशी नहीं… हमारे योद्धा महान, बिपिन रावत, शिवाजी, महाराणा, लक्ष्मीबाई
योगी आदित्यनाथ ने मंच से साफ कहा “सिकंदर नहीं, हमारे लिए महान वे हैं जो इस मिट्टी के लिए जिए: महाराणा प्रताप, शिवाजी महाराज, रानी लक्ष्मीबाई और जनरल बिपिन रावत।” उनका यह संदेश ऑडिटोरियम में बैठे हर युवा कैडेट के दिल में सीधा उतर गया और जोश भर गया।

कर्तव्य, अनुशासन और मातृभूमि बिपिन रावत का जीवन संदेश
योगी आदित्यनाथ ने कहा,“अनुशासन के बिना जीवन में दुशासन घुस जाता है। अगर जीवन को सही दिशा देनी है, तो प्रेरणा जनरल बिपिन रावत से लेनी होगी।”
उन्होंने भावुक होकर याद किया कि कैसे रावत के नेतृत्व में तीनों सेनाएं एकजुट होकर चलती थीं, उनकी सरलता हर दिल को छू जाती थी और मातृभूमि के प्रति उनका समर्पण किसी तपस्वी जैसा था।

सैनिक स्कूल के लिए एक प्रेरणा,हर साल 8 दिसंबर बने ‘प्रेरणा दिवस’
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब हर वर्ष 8 दिसंबर को सैनिक स्कूल गोरखपुर में “प्रेरणा दिवस” मनाया जाएगा। इस दिन कैडेट जनरल बिपिन रावत के साहस को याद करेंगे और उन शहीदों को नमन करेंगे जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित किया। यह दिन हर नई पीढ़ी को याद दिलाएगा कि देश की सेवा कोई करियर नहीं… बल्कि एक जीवनभर का संकल्प है।

 “रावत एक आदर्श, एक विरासत”: ले. जनरल विकास लखेड़ा
कार्यक्रम में ले. जनरल विकास लखेड़ा ने जनरल रावत को “हर सैनिक का आदर्श” बताया। पूर्व वायुसेना प्रमुख RKS भदौरिया भावुक होकर बोले “उनका साहस, उनकी रणनीति और उनकी मानवता… आने वाली पीढ़ियों की किताबों में स्वर्णाक्षरों में दर्ज रहेगी।” उनके शब्दों ने पूरे माहौल को गर्व और भावनाओं से भर दिया।

कार्यक्रम के अंत में, जब CM योगी ने जनरल रावत की बेटियों कृतिका और तारिणी को सम्मानित किया, पूरा ऑडिटोरियम स्वतः खड़ा हो गया। वो पल बता रहा था कि एक सैनिक सिर्फ सीमा पर नहीं लड़ता… वह हर पीढ़ी की धड़कनों में ज़िंदा रहता है।
जनरल रावत का जाना एक गहरा दर्द था, लेकिन उनकी विरासत? एक ऐसी रोशनी है जो हर युवा को दिशा देती है, क्योंकि कुछ लोग इतिहास में नहीं बसते…वे इतिहास की आत्मा बन जाते हैं।

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