देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल 2025 का पहला दिन जारी: जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ से नामी लेखकों तक, दून में छाया विचारों का संगम

देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल 2025 का पहला दिन जारी: जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ से नामी लेखकों तक, दून में छाया विचारों का संगम

देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल 2025 का पहला दिन दून इंटरनेशनल स्कूल में ऊर्जा और उत्साह के साथ जारी है। जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, शोभा थरूर, रूपा पाई, दिव्य प्रकाश दुबे जैसे दिग्गजों की मौजूदगी ने चर्चाओं को और रोचक बनाया है। कई महत्वपूर्ण सत्र लगातार हो रहे हैं और दर्शकों की भागीदारी भी उल्लेखनीय है।

दून इंटरनेशनल स्कूल में देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल 2025 का पहला दिन पूरे जोश और उत्साह के साथ जारी है। सुबह से ही स्कूल का परिसर साहित्य, संगीत, संवाद और रचनात्मकता से जगमगा उठा है। दर्शकों की अच्छी खासी भीड़ लगातार सत्रों में शामिल हो रही है, जिससे माहौल और अधिक जीवंत बना हुआ है। दिन की शुरुआत मशहूर लेखक रस्किन बॉन्ड के कीनोट एड्रेस से हुई। रस्किन बॉन्ड की उपस्थिति हमेशा की तरह दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने युवाओं, पढ़ने की संस्कृति और कहानियों की ताकत पर अपने विचार साझा किए, जिसके बाद दिनभर के सत्रों की एक सकारात्मक शुरुआत हुई।

वर्तमान में विभिन्न सत्र एक के बाद एक चल रहे हैं। ‘Sound of Women – Folk Music of Uttarakhand’ सत्र में उत्तराखंड की लोक संस्कृति और संगीत की झलक ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। कुमाऊँ की लोककथाएँ और गीतों ने सुबह के समय को बेहद मधुर बना दिया।

इस बीच, सबसे चर्चित सत्रों में से एक—‘We the Students of India – A Dialogue on Democracy’—ने युवाओं का खास ध्यान खींचा। देश के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने आधुनिक भारतीय लोकतंत्र, संविधान और युवा भागीदारी पर सरल और प्रभावशाली तरीके से बात की। विद्यार्थियों के सवालों का उन्होंने सहजता से जवाब दिया, और यह सत्र लगातार चर्चा में बना हुआ है।

दोपहर की ओर, ‘Apna Apna Normal – Our Lives, Our Stories’ और ‘The Circle of Belonging’ जैसे सत्र भी चल रहे हैं, जिनमें परिवार, समुदाय, बच्चों के अनुभवों और कहानियों पर दिलचस्प बातचीत हो रही है। जो चोपड़ा, सुचित्रा शेनॉय और एबी पाथक जैसे वक्ता भावनात्मक विकास और संवेदनशीलता पर महत्वपूर्ण विचार रख रहे हैं।

साथ ही, बच्चों के लिए रचनात्मक लेखन पर केंद्रित ‘Above Rhyme, Beyond Reason’ भी शुरू हो गया है, जिसमें शोभा थरूर श्रीनिवासन, रूपा पाई और वैशाली श्रॉफ बच्चों के लिए साहित्य की ज़रूरत और उसकी खूबसूरती पर बातचीत कर रही हैं। दिवस का माहौल लगातार ऊर्जावान बना हुआ है, और आगे भी जस्टिस चंद्रचूड़ के दूसरे सत्र, शिवानी पुरस्कार और दिव्य प्रकाश दुबे का ‘कहानी जंक्शन’ जैसे कई अहम कार्यक्रम तय हैं।

फिलहाल, देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल का पहला दिन विचारों और संवादों से भरा हुआ ज़ोरों पर जारी है।

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