दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे: उद्घाटन से पहले ही दरकी उम्मीदें

दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे: उद्घाटन से पहले ही दरकी उम्मीदें

जिस दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे का वर्षों से लोगों को इंतज़ार था, उसकी हकीकत उद्घाटन से पहले ही उजागर होने लगी है। यह बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट, जो राजधानी दिल्ली से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बीच सफर को 2.5 घंटे तक कम करने का दावा करता है, अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है, और पहले ही निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है।

उत्तराखंड में जारी भारी बारिश ने एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों को प्रभावित किया है। गणेशपुर से आशारोड़ी तक बने एलिवेटेड रोड के कई हिस्सों में सड़क उखड़ गई है। आशारोड़ी में पुलिस चौकी से पहले आठ से अधिक जगहों पर गड्ढे बन गए हैं। टनल के पास, जहां ‘उत्तराखंड में आपका स्वागत है’ के तहत सुंदर कलाकृतियां उकेरी गई हैं, ठीक वहीं सड़क पर गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जो न केवल ट्रैफिक के लिए खतरा हैं बल्कि पर्यटन और राज्य की छवि को भी धक्का पहुंचा सकते हैं।

दो किलोमीटर का ट्रायल, कई सवाल

हालांकि पूरा एलिवेटेड रोड अभी तक जनता के लिए नहीं खोला गया है, लेकिन मोहंड के पुराने मार्ग पर निर्माण कार्य के चलते लगभग दो किमी का हिस्सा ट्रायल के लिए खोला गया है। पर इस सीमित हिस्से की हालत भी बेहद खराब है। सड़कें उखड़ चुकी हैं और गड्ढे हर कुछ मीटर पर दिखाई देते हैं।

भूस्खलन और दरकते पहाड़

एक्सप्रेसवे का निर्माण कई जगहों पर पहाड़ों को काटकर किया गया है, खासकर आशारोड़ी और मोहंड के आसपास। बारिश के चलते ये पहाड़ी ढलान अब दरकने लगे हैं, जिससे मलबा और पत्थर सड़क पर गिर रहे हैं। इससे निर्माण के दौरान की गई ढलान स्थिरीकरण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

‘बारिश के चलते मरम्मत कार्य में बाधा आ रही है। गड्ढों को भर दिया गया था, लेकिन दोबारा बन गए हैं। बारिश के बाद सड़क मरम्मत कर दी जाएगी। जहां भूस्खलन हो रहा है, वहां ट्रीटमेंट के लिए वन विभाग से समन्वय किया जा रहा है।’ — पंकज मौर्य, परियोजना निदेशक, एनएचएआई

 

गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल

ऐसा नहीं है कि यह क्षति केवल उत्तराखंड वाले हिस्से में हुई है। सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) की सीमा में भी एलिवेटेड रोड के हिस्सों में गड्ढे और धंसी सड़कें देखी जा रही हैं। यह संकेत हैं कि पूरे कॉरिडोर में निर्माण की गुणवत्ता संदेह के घेरे में है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उद्घाटन से पहले ही सड़कें उखड़ने लगें और भूस्खलन शुरू हो जाए, तो यह न केवल सार्वजनिक धन का दुरुपयोग है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है।

प्रोजेक्ट की अहमियत

दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे को प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत राष्ट्रीय महत्त्व का प्रोजेक्ट माना गया है। इसके माध्यम से दिल्ली से देहरादून की दूरी लगभग 2.5 घंटे में तय की जा सकेगी, जो अभी 5-6 घंटे लगती है। इसके तहत 6-लेन एलिवेटेड रोड, टनल, और वायाडक्ट जैसी संरचनाएं बन रही हैं।

स्थानीय लोगों की चिंता

स्थानीय निवासी और यात्रा कर रहे लोग इस स्थिति से बेहद चिंतित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ‘अभी तो सड़क पूरी तरह से खुली भी नहीं है, और सड़क में गड्ढे दिखने लगे हैं। जब ट्रैफिक बढ़ेगा तब क्या हाल होगा?’

निगरानी और जवाबदेही की ज़रूरत

सवाल यह है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट की निगरानी किस स्तर पर की गई? क्या एनएचएआई, ठेकेदार और राज्य एजेंसियों ने निर्माण के दौरान जलवायु और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का आकलन किया? और यदि किया, तो उसके अनुरूप निर्माण क्यों नहीं हुआ?

दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे भले ही तकनीकी रूप से एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट हो, लेकिन इसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और टिकाऊपन पर कई गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। उद्घाटन से पहले ही सड़कें उखड़ना और ढलानों का दरकना एक चेतावनी है, कि अगर तुरंत सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो ये एक्सप्रेसवे एक विकास की कहानी बनने के बजाय एक इंजीनियरिंग विफलता में बदल सकता है।

Hill Mail
ADMINISTRATOR
PROFILE

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

विज्ञापन

[fvplayer id=”10″]

Latest Posts

Follow Us

Previous Next
Close
Test Caption
Test Description goes like this