दिल्ली की नौकरी छोड़ पहाड़ लौटे संदीप पांडेय ने 160 रुपये से HimFla की शुरुआत की। पारंपरिक पिस्यूं लूण से जन्मा यह ब्रांड आज 1.5 करोड़ टर्नओवर के साथ ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आत्मसम्मान दे रहा है। यह कहानी जिद, जड़ों और आत्मनिर्भरता की मिसाल है।
यह कहानी सिर्फ एक स्टार्टअप की नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के युवाओं के आत्मविश्वास, जिद और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की सोच की मिसाल है। यह कहानी है संदीप पांडेय की, जिन्होंने महानगर की सुरक्षित ज़िंदगी छोड़कर अपने पहाड़, नैनीताल, लौटने का साहसिक फैसला लिया।
दिल्ली में एक स्थिर इंजीनियरिंग नौकरी छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन संदीप के लिए नौकरी से ज्यादा अहम था कुछ ऐसा करना, जो उनकी मिट्टी से जुड़ा हो और पहाड़ के लोगों के काम आए। वे जानते थे कि उत्तराखंड की असली ताकत उसके लोग, उसकी महिलाएं और उसके पारंपरिक उत्पाद हैं बस जरूरत थी उन्हें पहचान देने की। हालांकि, 2013 की विनाशकारी आपदा ने उनके सपनों को गहरी चोट पहुंचाई। संसाधन खत्म हो गए, आर्थिक हालात बिगड़ गए और भविष्य अनिश्चित दिखने लगा। लेकिन इस मुश्किल दौर में भी संदीप ने हार नहीं मानी। उनके लिए यह आपदा अंत नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दौर बन गई।
इसी दौरान पहाड़ की मेहनती महिलाओं के साथ बैठकर खाया गया पारंपरिक पिस्यूं लूण उनकी सोच की दिशा बदलने वाला पल साबित हुआ। संदीप को एहसास हुआ कि जिन चीज़ों को हम रोज़मर्रा का साधारण हिस्सा मानते हैं, वही हमारी सबसे बड़ी ताकत हो सकती हैं। यहीं से उत्तराखंड के पारंपरिक स्वाद और ज्ञान को दुनिया तक पहुँचाने का विचार जन्मा। सिर्फ 160 रुपये की छोटी-सी पूंजी और दोस्तों के सहयोग से शुरू हुआ यह सफर आज HimFla नाम के एक मजबूत और भरोसेमंद ब्रांड में बदल चुका है। संदीप ने पहाड़ के पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और सही मार्केटिंग के साथ बाजार से जोड़ा।
आज HimFla के उत्पाद देश के बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों तक भी पहुँच रहे हैं। कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 1.5 करोड़ रुपये है और लागत निकालने के बाद अच्छा मुनाफा भी हो रहा है। लेकिन संदीप के लिए असली सफलता आंकड़ों में नहीं, बल्कि उन पहाड़ी महिलाओं की मुस्कान में है, जिन्हें इस स्टार्टअप से सम्मान और नियमित रोजगार मिला है। आज कई ग्रामीण महिलाएं HimFla से जुड़कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं। यह मॉडल बताता है कि अगर सोच सही हो, तो विकास और परंपरा साथ-साथ चल सकते हैं।
HimFla की कहानी यह सिखाती है कि आपदा अंत नहीं होती, बल्कि नए रास्तों की शुरुआत भी बन सकती है। धैर्य, सही सोच और अपनी जड़ों पर भरोसा हो, तो पहाड़ से भी वैश्विक पहचान बनाई जा सकती है। यह सफर हर युवा को संदेश देता है, हालात कितने भी कठिन हों, अगर इरादे मजबूत हों तो पहाड़ भी रास्ता दे देता है।








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