Tuesday , 22 September 2026
Home अतुल्य उत्तराखंड त्रियुगीनारायण में धूमधाम से मनाया गया हरियाली मेला, भगवान विष्णु को चढ़ाई गई जौ की हरियाली
अतुल्य उत्तराखंडउत्तराखंड न्यूज़रुद्रप्रयागसरोकार

त्रियुगीनारायण में धूमधाम से मनाया गया हरियाली मेला, भगवान विष्णु को चढ़ाई गई जौ की हरियाली

भगवान शिव और माता पार्वती की पावन विवाह स्थली के रूप में प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण में धुर्वाष्टमी के अवसर पर ऐतिहासिक हरियाली मेला श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान केदारघाटी के ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में त्रियुगीनारायण मंदिर पहुंचे और जौ की हरियाली की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सबसे पहले जौ की हरियाली भगवान विष्णु को अर्पित की गई। इसके बाद इसे प्रसाद के रूप में गांव के घर-घर पहुंचाया गया।

 

हरियाली पर्व की तैयारियां ग्रामीणों ने करीब सात दिन पहले शुरू कर दी थीं। परंपरा के अनुसार गांव की महिलाएं अपने-अपने घरों में जौ बोकर हरियाली तैयार करती हैं। धुर्वाष्टमी के दिन घरों में उगाई गई हरियाली को एकत्र कर ग्रामीण मंदिर पहुंचते हैं। यहां पुजारी वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सामूहिक पूजा कराते हैं। पूजा के बाद हरियाली भगवान नारायण के चरणों में अर्पित की जाती है।

मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद ग्रामीण हरियाली को लेकर गांव के घरों में पहुंचे। बुजुर्गों को हरियाली भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक एकजुटता और आपसी भाईचारे का भी प्रतीक है। हरियाली को शुभता, समृद्धि और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। पर्व के दौरान पारंपरिक गीतों और धार्मिक जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय नजर आया।

भगवान विष्णु को हरियाली चढ़ाने की मान्यता

त्रियुगीनारायण में जौ की हरियाली भगवान विष्णु को अर्पित करने के पीछे एक पौराणिक मान्यता जुड़ी हुई है। स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान विष्णु के वामन अवतार से पहले माता अदिति और देव कन्याओं ने उनके विराट स्वरूप के दर्शन किए थे। भगवान के दिव्य स्वरूप से प्रसन्न होकर उन्होंने जौ की हरियाली अर्पित की थी। इसी मान्यता के आधार पर त्रियुगीनारायण में धुर्वाष्टमी के दिन भगवान नारायण को सबसे पहले हरियाली चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।

त्रियुगीनारायण का धार्मिक महत्व

त्रियुगीनारायण मंदिर का धार्मिक महत्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह स्थल के रूप में विशेष है। मान्यता है कि इसी स्थान पर दोनों का विवाह संपन्न हुआ था। यही कारण है कि यहां होने वाले धार्मिक आयोजन स्थानीय लोगों के साथ देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष महत्व रखते हैं।

हरियाली मेले के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ स्थानीय लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। ग्रामीणों की पारंपरिक वेशभूषा, गीत, सामूहिक पूजा और धार्मिक जयकारों ने आयोजन को खास बना दिया। हरियाली पर्व के बाद त्रियुगीनारायण में वामन द्वादशी का आयोजन भी धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी पौराणिक विरासत, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का माध्यम हैं।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

सहकारिता से मजबूत होंगे गांव, समृद्ध होगा उत्तराखंड: सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सहकारिता उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था...