भारतीय सेना और उत्तराखंड पर्यटन विभाग के सहयोग से आयोजित ‘इंडियन हिमालयन मोटरसाइकिल अभियान 2025 का देहरादून से भव्य शुभारंभ किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देना तथा साहसिक खेलों व हाई-एल्टीट्यूड टूरिज्म को लोकप्रिय बनाना है।
भारतीय सेना और उत्तराखंड पर्यटन विभाग के सहयोग से आयोजित ‘इंडियन हिमालयन मोटरसाइकिल अभियान 2025 (I-HiMEx-2.0)’ का देहरादून से भव्य और औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह अनूठा मोटरसाइकिल अभियान उत्तराखंड की दुर्गम हिमालयी वादियों में सैन्य कौशल, अदम्य साहस, टीम भावना और पर्यावरणीय चेतना का प्रतीक है।
इस अवसर पर सेना और पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही:
● लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, PVSM, UYSM, AVSM, YSM – सेनानायक, केंद्रीय कमान
● लेफ्टिनेंट जनरल डी.जी. मिश्रा, AVSM – सेनानायक, उत्तर बंगाल क्षेत्र
● मेजर जनरल एम.पी.एस. गिल, VSM – उप-सेनानायक, उत्तराखण्ड उपक्षेत्र, देहरादून
● ब्रिगेडियर एम.एस. ढिल्लों, VSM – कमांडर, 9 (I) माउंटेन ब्रिगेड ग्रुप
● कर्नल मौसम कुमार – कमांडिंग ऑफिसर, 288 मीडियम रेजीमेंट
● लेफ्टिनेंट कमांडर दीपक खंडूरी – निदेशक (इन्फ्रास्ट्रक्चर), उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देना तथा साहसिक खेलों व हाई-एल्टीट्यूड टूरिज्म को लोकप्रिय बनाना है। फ्लैग-ऑफ समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य को वैश्विक पहचान देंगे, बल्कि युवाओं को साहसिक गतिविधियों की ओर भी प्रेरित करेंगे।
इस अभियान में कुल 22 राइडर्स भाग ले रहे हैं, जिनमें 10 भारतीय सेना के जवान तथा 12 राइडर्स रॉयल एनफील्ड कम्युनिटी से हैं। यह दल उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के कठिन पर्वतीय रास्तों, ऊंची चोटियों और प्राकृतिक चुनौतियों से होते हुए गुजरेगा, जिससे स्थानीय भूगोल, संस्कृति और पर्यटन को नई ऊर्जा मिलेगी।
लगभग 2000 किलोमीटर की दूरी तय करने वाला यह अभियान देहरादून, जोशीमठ, माणा, रिमखिम, हर्षिल जैसे महत्वपूर्ण साहसिक स्थलों से गुजरते हुए रुड़की में सम्पन्न होगा।
यह अभियान सेना की राष्ट्र सेवा, साहस और अनुशासन की भावना को प्रदर्शित करने के साथ-साथ उत्तराखंड को एडवेंचर टूरिज्म के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग का मानना है कि इस प्रकार की पहलें राज्य के पर्वतीय एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में सतत और समावेशी पर्यटन विकास को गति देंगी।








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