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मशरूम उत्पादन से आय बढ़ाने की दिशा में पंतनगर विश्वविद्यालय की पहल

पंतनगर विश्वविद्यालय में मशरूम उत्पादन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमें बताया गया कि मशरूम से अचार, सूप, पाउडर, नगेट्स जैसे अनेक वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिनसे किसानों की आय में अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।

पंतनगर विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ढकरानी ने जनजातीय समुदाय की आय में वृद्धि के उद्देश्य से मशरूम उत्पादन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वित्तपोषित जनजातीय उपयोजना (TSP) परियोजना के अंतर्गत विकासनगर ब्लॉक के शाहपुर एवं कल्याणपुर क्षेत्र में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्थानीय जनजातीय परिवारों को मशरूम खेती, प्रबंधन तकनीकों एवं मूल्य संवर्धन की जानकारी प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था।

उद्घाटन एवं उद्देश्य

कार्यक्रम का उद्घाटन परियोजना समन्वयक डॉ. श्वेता चौधरी द्वारा किया गया। उन्होंने उपस्थित किसानों एवं महिलाओं को संबोधित करते हुए बताया कि वर्तमान समय में मशरूम उत्पादन केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक उभरता हुआ उद्यमशीलता तथा स्व-रोज़गार का प्रभावी माध्यम बन चुका है।

उन्होंने विपणन रणनीतियों, पैकेजिंग की आधुनिक विधियों तथा सरकार की विभिन्न स्टार्टअप सहायता योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर कम जगह एवं कम लागत में भी मशरूम उत्पादन से उत्कृष्ट आय प्राप्त की जा सकती है।

तकनीकी प्रशिक्षण सत्र

तकनीकी सत्र का संचालन मशरूम विशेषज्ञ शुभम बडोला द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को ऑयस्टर एवं बटन मशरूम की खेती की संपूर्ण प्रक्रिया से अवगत कराया, जिसमें शामिल थे — बीज चयन, कंपोस्ट तैयारी, बैग फिलिंग, तापमान एवं नमी नियंत्रण, रोग एवं कीट प्रबंधन और कटाई एवं पैदावार बढ़ाने की तकनीकें।

उन्होंने बताया कि मशरूम से अचार, सूप, पाउडर, नगेट्स जैसे अनेक वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिनसे किसानों की आय में अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।

प्रशिक्षण के उपरांत प्रतिभागियों को ऑयस्टर एवं बटन मशरूम के रेडीमेड बैग, प्लास्टिक स्प्रे बोतलें, फार्मेलीन तथा आवश्यक रसायन वितरित किए गए, ताकि वे तुरंत उत्पादन कार्य आरंभ कर सकें। इससे किसानों में उत्साह एवं आत्मविश्वास स्पष्ट नजर आया।

कार्यक्रम के सफल संचालन में कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के प्रभारी अधिकारी डॉ. एके शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही, कल्याणपुर की प्रभा देवी ने ग्रामीण महिलाओं को अधिक संख्या में प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया एवं प्रभाव

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने बताया कि यह प्रशिक्षण उनके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। अनेक किसानों ने पहली बार मशरूम उत्पादन के विभिन्न आयामों—खेती, प्रबंधन, प्रसंस्करण और विपणन—के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे अपने खेतों एवं घरों में सीखी गई तकनीकों को लागू करेंगे और गांव में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देंगे।

आयोजकों के अनुसार, ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल जनजातीय समुदाय को आत्मनिर्भर बनाते हैं, बल्कि उन्हें छोटे स्तर पर ही सही, परंतु स्थायी आय के अवसर प्रदान करते हैं। इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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Hill Mail

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