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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाव-भाव, पहनावे से जुड़ी हर बात उन्हें दूसरों से अलग करती है। साल 2014 में देश की कमान संभालने के बाद से गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर उनका पहनावा और सिर पर बांधी जाने वाली पगड़ी चर्चा का विषय रही है। लेकिन इस गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी पगड़ी की जगह एक खास तरह की टोपी पहने नजर आए। यह उत्तराखंड की पारंपरिक टोपी थी, जिस पर चार रंगों की एक तिरछी पट्टी और उत्तराखंड का राज्य पुष्प ब्रह्मकमल लगा हुआ था। बस पीएम मोदी की ‘ब्रांडिंग’ ने उत्तराखंड की इस पारंपरिक टोपी को वैश्विक पहचान दिला दी है। आज यह टोपी इतनी डिमांड में है कि इसे तैयार करने वाले कारीगर मांग पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
READ MORE32 झांकियों के बीच प्रतिस्पर्धा थी, इनमें से 17 झांकियों का चयन इस साल राजपथ पर प्रदर्शन के लिए किया गया है। उत्तराखंड की झांकी के अगले हिस्से में राज्य पशु ‘कस्तूरी मृग‘, राज्य पक्षी ‘मोनाल’ एवं राज्य पुष्प ‘ब्रह्मकमल’ तथा पिछले हिस्से में केदारनाथ मंदिर परिसर, भीमशिला और ऋद्धालुओं को दर्शाया गया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाव-भाव, पहनावे से जुड़ी हर बात उन्हें दूसरों से अलग करती है। साल 2014 में देश की कमान संभालने के बाद से गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर उनका पहनावा और सिर पर बांधी जाने वाली पगड़ी चर्चा का विषय रही है। लेकिन इस गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी पगड़ी की जगह एक खास तरह की टोपी पहने नजर आए। यह उत्तराखंड की पारंपरिक टोपी थी, जिस पर चार रंगों की एक तिरछी पट्टी और उत्तराखंड का राज्य पुष्प ब्रह्मकमल लगा हुआ था। बस पीएम मोदी की ‘ब्रांडिंग’ ने उत्तराखंड की इस पारंपरिक टोपी को वैश्विक पहचान दिला दी है। आज यह टोपी इतनी डिमांड में है कि इसे तैयार करने वाले कारीगर मांग पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
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32 झांकियों के बीच प्रतिस्पर्धा थी, इनमें से 17 झांकियों का चयन इस साल राजपथ पर प्रदर्शन के लिए किया गया है। उत्तराखंड की झांकी के अगले हिस्से में राज्य पशु ‘कस्तूरी मृग‘, राज्य पक्षी ‘मोनाल’ एवं राज्य पुष्प ‘ब्रह्मकमल’ तथा पिछले हिस्से में केदारनाथ मंदिर परिसर, भीमशिला और ऋद्धालुओं को दर्शाया गया है।
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