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चंपावत में स्थित झूमा देवी मंदिर में भक्तो की भीड़ लगी रहती है। मान्यता है की इस मंदिर में निसंतान दंपतियों की गोद भर जाती है।
READ MOREबाबा विश्वनाथ माँ जगदीशिला की 23 वीं डोली रथ यात्रा नंदा देवी राजजात यात्रा के अंतिम सीमांत वाण गांव में पहुंची। जहां ग्रामीणों ने डोली का भव्य स्वागत किया। बुधवार को सुबह डोली वाण गांव में स्थित भगवान लाटू देवता के मंदिर में पहुंची और पूजा अर्चना के पश्चात नंदा देवी चौक में श्रद्धालुओं को आशीष वचन दिया और उनकी कुशलक्षेम की कामना करते हुये रात्रि विश्राम के लिए डोली भराडी बाराही मंदिर, कपकोट के लिए रवाना हो गयी। वाण गांव के समस्त ग्रामीणों नें डोली रथ यात्रा का भव्य स्वागत किया।
READ MOREमहासू देवता से जो भी सच्चे दिल से कुछ मांगता है वह उसकी मुराद पूरी हो जाती है। महासू देवता के बारे में आज भी रहस्य है कि केवल मंदिर का पुजारी ही मंदिर में प्रवेश कर सकता है। मंदिर में हमेशा एक ज्योति जलती रहती है जो दशकों से जल रही है।
READ MOREहिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। यह पुण्य भूमि कई देवी-देवताओं का निवास स्थान है। चार धामों वाला यह दिव्य क्षेत्र मनमोहक प्राकृतिक आकर्षणों, घने जगंलों और हिम पर्वतों से घिरा है। उत्तराखंड विश्व पटल पर भारत के प्रमुख धार्मिक केंद्रों का प्रतिनिधित्व करता है। उत्तराखंड को भगवान महादेव की तपस्थली कहा जाता है। यहां कई ऐसे शिवालय हैं जिनका इतिहास कई युगों पुराना है। कई का इतिहास रामायण, महाभारत काल से सीधा जुड़ा है। उत्तराखंड के देहरादून में एक ऐसा ही मंदिर है टपकेश्वर महादेव।
READ MOREएमआईटी विश्व शांति विश्वविद्यालय पुणे के संस्थापक और चांसलर प्रो. विश्वनाथ कराड के प्रयासों से माणा गांव में मां सरस्वती के इस भव्य मंदिर की स्थापना की गई है। इसके साथ ही यहां भीम पुल के पार स्वर्गरोहणी मार्ग पर धर्मराज युधिष्ठिर के श्वान तथा द्रोपदी संग पांच पांडवों की 12-12 फीट ऊंची भव्य मूर्तियां भी लगाई जा रही हैं।
READ MOREप्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि रामबाड़ा से केदारनाथ तक छोटे-छोटे पैच को केदारनाथ की ऐतिहासिकता से जोड़ा जाए, ताकि श्रद्धालुओं को केदारनाथ के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व के बारे में भी रोचक जानकारियां मिल सके।
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चंपावत में स्थित झूमा देवी मंदिर में भक्तो की भीड़ लगी रहती है। मान्यता है की इस मंदिर में निसंतान दंपतियों की गोद भर जाती है।
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बाबा विश्वनाथ माँ जगदीशिला की 23 वीं डोली रथ यात्रा नंदा देवी राजजात यात्रा के अंतिम सीमांत वाण गांव में पहुंची। जहां ग्रामीणों ने डोली का भव्य स्वागत किया। बुधवार को सुबह डोली वाण गांव में स्थित भगवान लाटू देवता के मंदिर में पहुंची और पूजा अर्चना के पश्चात नंदा देवी चौक में श्रद्धालुओं को आशीष वचन दिया और उनकी कुशलक्षेम की कामना करते हुये रात्रि विश्राम के लिए डोली भराडी बाराही मंदिर, कपकोट के लिए रवाना हो गयी। वाण गांव के समस्त ग्रामीणों नें डोली रथ यात्रा का भव्य स्वागत किया।
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