आतंकवादियों ने मणिपुर में असम राइफल्स के दल पर किया हमला, दो जवान शहीद, पांच घायल

आतंकवादियों ने मणिपुर में असम राइफल्स के दल पर किया हमला, दो जवान शहीद, पांच घायल

मणिपुर में एक बार फिर उग्रवाद ने सिर उठाया है। एक बेहद साहसिक और सुनियोजित हमले में अज्ञात आतंकवादियों ने असम राइफल्स की 33वीं बटालियन के एक वाहन दल को निशाना बनाया। यह हमला उस क्षेत्र में हुआ है, जहां हाल ही में AFSPA (सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम) को निरस्त किया गया था।

मणिपुर में आतंकवादियों ने एक बार फिर कायराना हरकत की है उन्होंने असम राइफल्स के जवानों पर हमला किया है। यह हमला शाम करीब 5:50 बजे को तब हुआ, जब असम राइफल्स के जवानों का एक वाहन काफिला राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर नंबोल सबल लेकाई इलाके से गुजर रहा था। यह इलाका अब AFSPA के दायरे में नहीं आता और इसे अपेक्षाकृत शांत क्षेत्र माना जा रहा था।

कैसे हुआ हमला?

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, असम राइफल्स की टुकड़ी वाहनों में गश्त पर थी जब घात लगाकर बैठे आतंकवादियों ने अचानक स्वचालित हथियारों से फायरिंग शुरू कर दी। यह हमला पूरी तरह से अप्रत्याशित और एकतरफा था, जिसे ‘अनप्रोवोक्ड फायरिंग’ बताया गया है।

हमले के जवाब में जवानों ने भी मोर्चा संभाला, लेकिन पहले हमले में ही दो जवान शहीद हो गए और पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्परता से इंफाल स्थित RIMS (रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, सभी घायल जवान फिलहाल स्थिर हैं।

AFSPA निरस्त क्षेत्र में हमला – सुरक्षा पर सवाल

हमले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह AFSPA निरस्त क्षेत्र में हुआ है। पिछले कुछ वर्षों से मणिपुर के कुछ हिस्सों से AFSPA हटाया गया था, जिससे स्थानीय प्रशासन और नागरिक समूहों को राहत मिली थी। लेकिन इस घटना ने दिखा दिया है कि सुरक्षा स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।

राज्यपाल ने की हमले की निंदा

मणिपुर के राज्यपाल ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने बलिदान जवानों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की और कहा कि राष्ट्र की रक्षा में उनका बलिदान सदैव याद रखा जाएगा। राज्यपाल ने घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की भी कामना की। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे घृणित आतंकी कृत्य किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए कठोरतम कदम उठाए जाएंगे।

शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि

असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा ने इस उग्रवादी हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि नायब सूबेदार श्याम गुरुङ और राइफलमैन रंजीत सिंह कश्यप अपने कर्तव्य पालन के दौरान आज अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने शहीद जवानों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और वीर सैनिकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।

कोई संगठन नहीं आया सामने

अब तक किसी भी आतंकवादी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। सुरक्षा एजेंसियां इसे एक सुनियोजित और रणनीतिक हमला मान रही हैं। खुफिया एजेंसियों को शक है कि इसमें स्थानीय उग्रवादी गुट या सीमा पार से आए प्रशिक्षित आतंकवादी शामिल हो सकते हैं।

सर्च ऑपरेशन शुरू

हमले के बाद पूरे इलाके में बड़ा तलाशी अभियान (कॉम्बिंग ऑपरेशन) शुरू कर दिया गया है। मणिपुर पुलिस, असम राइफल्स और अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों की टीमें संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद से जंगलों और आसपास के गांवों की सघन तलाशी ली जा रही है।

स्थानीय नागरिकों में भय

हमले के बाद स्थानीय नागरिकों में भी भय का माहौल है। कई लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि AFSPA के हटने के बाद भी आतंकवादी खुलेआम हमला कर सकते हैं, तो आम नागरिक कितने सुरक्षित हैं।

इस हमले ने यह संकेत दिया है कि मणिपुर में हालात अब भी संवेदनशील हैं, और सुरक्षा बलों को उच्चतम सतर्कता के साथ कार्य करना होगा। यह घटना न केवल शांति प्रक्रिया के लिए झटका है, बल्कि AFSPA हटाने के फैसले की समीक्षा की मांग भी खड़ी कर सकती है।

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