चार-दिवसीय 119वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह विश्वविद्यालय के गांधी हॉल में आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि माननीय पूर्व राज्यपाल, महाराष्ट्र तथा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री पद्म भूषण श्री भगत सिंह कोश्यारी थे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनमोहन सिंह चौहान, अधिष्ठाता कृषि डॉ. सुभाष चन्द्र, निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. जितेन्द्र क्वात्रा तथा निदेशक शोध डॉ. एस.के. वर्मा मंचासीन रहे।
मुख्य अतिथि भगत सिंह कोश्यारी ने पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि किसान मेले के माध्यम से किसानों, वैज्ञानिकों और छात्रों को एक ही स्थान पर सीखने और अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं है, बल्कि यहां से किसान नई तकनीक और नई प्रेरणा लेकर अपने गांवों तक जाते हैं। किसान यहां केवल सीखने ही नहीं आते, बल्कि अपने अनुभव भी साथ लेकर आते हैं, जिससे ज्ञान का आदान-प्रदान और अधिक प्रभावी होता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति में किसान और वैज्ञानिक दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। भारत प्राचीन काल से ही अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ता रहा है और आज विश्व में एक नई शक्ति के रूप में उभर रहा है। भारत तेजी से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान “ऋषि और कृषि” से बनती है। हमारी परंपरा ऋषियों के ज्ञान और किसानों की मेहनत पर आधारित रही है।
मुख्य अतिथि ने वैज्ञानिकों, छात्रों और शोधकर्ताओं से अपील की कि वे अपने ज्ञान और अनुसंधान को किसानों तक पहुंचाने का कार्य निरंतर करते रहें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को क्यूएस रैंकिंग में स्थान प्राप्त होना गर्व की बात है, लेकिन असली सफलता तब होगी जब यहां से सीखकर किसान अपने खेतों में नई तकनीक अपनाएं और अपनी आय तथा उत्पादन बढ़ाएं।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया में मोटे अनाज की मांग तेजी से बढ़ रही है। पहले इन्हें गरीबों का भोजन माना जाता था, लेकिन आज स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होने के कारण देश-विदेश में इनकी मांग बढ़ गई है। उन्होंने इन फसलों के उत्पादन और आधुनिक तकनीकों के विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पंतनगर विश्वविद्यालय से प्राप्त ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि अनुसंधान का परिणाम खेतों में दिखाई देना चाहिए और उसका सीधा लाभ किसानों तथा ग्रामीण समाज तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर देते हुए कहा कि पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना समय की आवश्यकता है।
अंत में उन्होंने किसानों से नई तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि जब किसान आगे बढ़ेंगे, तभी प्रदेश और देश आत्मनिर्भर बनेंगे। उन्होंने किसानों, वैज्ञानिकों और छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में किसान मेला और अधिक भव्य तथा सफल बनेगा।
किसान मेले की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि श्री कोश्यारी एक ऊर्जावान और प्रेरणादायी व्यक्तित्व के धनी हैं। उन्होंने कहा कि श्री कोश्यारी को देश के प्रतिष्ठित सम्मान पद्म भूषण से अलंकृत किया गया है और यह विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है कि सम्मान प्राप्त करने के बाद वे पहली बार पंतनगर विश्वविद्यालय आए हैं।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय किसानों को नई तकनीकों और उन्नत फसल किस्मों की जानकारी देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित उन्नत बीज, आधुनिक कृषि उपकरण, पशुपालन तकनीक तथा कृषि आधारित नवाचार किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं। विश्वविद्यालय कृषि यंत्रीकरण, डेयरी, मत्स्य पालन, बागवानी, मशरूम उत्पादन तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आज कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए किसानों को वैज्ञानिक खेती और नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक गोष्ठियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को इन चुनौतियों से निपटने के लिए मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में चार-दिवसीय 119वें किसान मेले के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. जितेन्द्र क्वात्रा ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा लगभग 50 लाख रुपये के बीज, पौधे एवं कृषि साहित्य की बिक्री की गई। उन्होंने बताया कि इस मेले में विभिन्न फर्मों, विश्वविद्यालय तथा अन्य सरकारी संस्थाओं के लगभग 416 छोटे-बड़े स्टॉल लगाए गए और लगभग 21,500 से अधिक पंजीकृत एवं अपंजीकृत किसानों तथा विद्यार्थियों ने मेले का भ्रमण किया।
विश्वविद्यालय में आयोजित इस किसान मेले के समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं तथा प्रदर्शनों के आधार पर प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। पौष्टिक भोजन कम दामों पर उपलब्ध कराने के लिए प्रशंसनीय कार्य हेतु महिला क्लब, पंतनगर को सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार महिला क्लब की अध्यक्षा श्रीमती वीना चौहान एवं उनकी टीम ने प्राप्त किया।
इस अवसर पर चयनित स्टॉलों को भी पुरस्कृत किया गया। किसान मेले में सर्वोत्तम प्रदर्शन के लिए मैसर्स ए.एच. एसोसिएट्स, काशीपुर तथा सर्वोत्तम स्टॉल के लिए मैसर्स जय गुरुदेव इंडस्ट्रीज, रुद्रपुर को सम्मानित किया गया।
किसान मेले के अंतर्गत 13-14 मार्च को आयोजित उद्यान प्रदर्शनी में गमलों में लगे पौधे, कटे फूल, फल, सब्जियां तथा प्रसंस्करित उत्पादों की विभिन्न श्रेणियों में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें कुल 66 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें से 63 प्रतिभागियों को विभिन्न वर्गों में पुरस्कार प्रदान किए गए। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उत्तराखंड सैनिक पुनर्वास संस्था को प्रथम तथा उत्तराखंड सैनिक फार्म को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को घरेलू उत्पादों एवं मोटे अनाज से तैयार उत्पादों के लिए भी सम्मानित किया गया। इसके साथ ही पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान महाविद्यालय के विद्यार्थियों को मॉडल के माध्यम से नवाचार प्रस्तुत करने हेतु प्रोत्साहन राशि देकर पुरस्कृत किया गया।
इसके अतिरिक्त किसान मेले में आयोजित पशु प्रदर्शनी तथा अन्य प्रतियोगिताओं में विभिन्न स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को भी पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही मेले में लगाए गए विभिन्न वर्गों के स्टॉलों को उनके प्रदर्शन और बिक्री के आधार पर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. एस.के. वर्मा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, निदेशकगण, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, विद्यार्थी तथा कृषक उपस्थित रहे।










