पहाड़ से उठी मानवता की अनोखी आवाज़

पहाड़ से उठी मानवता की अनोखी आवाज़

मौत को अक्सर जीवन का अंत माना जाता है, लेकिन टिहरी गढ़वाल जिले के नंदगांव के 25 वर्षीय युवा रोहित कलुड़ा ने इसे कई ज़िंदगियों की नई शुरुआत का माध्यम बना दिया है। अपने जीवनकाल में ही 14 अंगों और ऊतकों के दान का औपचारिक संकल्प लेकर रोहित ने इंसानियत की एक असाधारण मिसाल पेश की है।

रोहित टिहरी जिले के पहले ऐसे युवा बन गए हैं जिन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत National Organ and Tissue Transplant Organization (NOTTO) में पंजीकरण कराकर अंगदान का संकल्प लिया है। उनका यह निर्णय भविष्य में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कई लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है।

अंगदान फॉर्म पर हस्ताक्षर करते समय रोहित भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि शरीर तो एक दिन मिट्टी में मिल ही जाना है, लेकिन यदि उसके अंग किसी को नया जीवन दे सकें, किसी की धड़कन वापस लौटा सकें या किसी की दुनिया फिर से रोशनी से भर सकें, तो इससे बड़ा उद्देश्य कोई नहीं हो सकता।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, रोहित के इस निर्णय से कम से कम आठ लोगों को जीवनदान मिल सकता है, जबकि कई अन्य लोगों को ऊतक प्रत्यारोपण से लाभ मिल सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में, जहां अंगदान को लेकर अब भी संकोच और भ्रांतियां मौजूद हैं, वहां यह कदम समाज में जागरूकता की मजबूत नींव रखेगा।

रोहित के इस साहसिक फैसले ने नंदगांव को गर्व से भर दिया है। स्थानीय लोगों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने इसे मानवता के पक्ष में उठाया गया ऐतिहासिक कदम बताया है।

युवाओं को संदेश देते हुए रोहित ने कहा कि वे चाहते हैं कि उनके जाने के बाद भी उनका अस्तित्व किसी की मुस्कान, किसी की आंखों और किसी की सांसों में ज़िंदा रहे।

निस्संदेह, रोहित का यह संकल्प दर्शाता है कि इंसान शरीर से नहीं, बल्कि अपने विचारों और कर्मों से अमर होता है।

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