उत्तराखंड कांग्रेस ने देहरादून स्थित कांग्रेस भवन में अपने वरिष्ठ नेताओं के लिए स्थायी बैठने की व्यवस्था कर दी है। प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य और करण माहरा जैसे नेताओं के लिए अलग कार्यालय बनाए गए हैं। संगठन में समन्वय, संवाद और गतिविधियों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह नया प्रबंधन लागू किया गया है।
देहरादून स्थित प्रदेश कांग्रेस भवन में लंबे समय से चली आ रही एक जरूरत आखिरकार पूरी हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अब स्थायी रूप से बैठने और काम करने के लिए अपना अलग स्थान मिल गया है। कई महीनों से संगठन के भीतर यह आवाज उठ रही थी कि वरिष्ठ नेताओं का न सिर्फ कांग्रेस भवन में नियमित आना-जाना होना चाहिए, बल्कि उन्हें एक ऐसा ठिकाना भी मिले जहां बैठकें, चर्चा और संगठनात्मक काम सुचारू रूप से किए जा सकें।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस आवश्यकता को देखते हुए बड़ा निर्णय लिया है। उनके निर्देश पर कांग्रेस भवन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, पूर्व मंत्री और दिग्गज नेता डॉ. हरक सिंह रावत, अनुभवी नेता यशपाल आर्य और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा के लिए अलग-अलग कार्यालय की व्यवस्था कर दी गई है। कांग्रेस के भीतर इन नेताओं की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। संगठनात्मक अनुभव, वर्षों की राजनीतिक समझ और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव ये सभी बातें इन्हें पार्टी की रीढ़ बनाती हैं। अब इनके लिए तय किए गए इन कमरों में न सिर्फ रोजमर्रा की बैठकें होंगी, बल्कि प्रदेश स्तर की रणनीतियाँ भी तैयार की जाएंगी।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस भवन में इस फैसले का मकसद केवल सुविधा देना नहीं, बल्कि नेताओं के बीच समन्वय को और मजबूत बनाना है। बीते दिनों कई मौकों पर यह महसूस किया गया कि वरिष्ठ नेता अलग-अलग स्थानों पर बैठकर काम कर रहे थे, जिससे संवाद में दूरी आ जाती थी। नई व्यवस्था से पार्टी कार्यालय में गतिविधियाँ तेज़ होंगी और संगठनात्मक मजबूती बढ़ेगी।गणेश गोदियाल ने यह भी स्पष्ट किया है कि चुनावी माहौल में सक्रियता बढ़ाना अब पार्टी की प्राथमिकता है। प्रीतम सिंह को पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति में जिम्मेदारी मिली है, वहीं हरक सिंह रावत को प्रदेश चुनाव प्रबंध समिति में शामिल किया गया है। यशपाल आर्य और करण माहरा संगठन के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। ऐसे में इन नेताओं की मौजूदगी कांग्रेस भवन में बड़े बदलाव लाएगी।
इन सभी वरिष्ठ नेताओं के बैठने की व्यवस्था होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस भवन अब पहले की तुलना में अधिक सक्रिय, अधिक व्यवस्थित और अधिक लोकतांत्रिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा।








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