उत्तराखंड सरकार ने पीआरडी जवानों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सामान्य ड्यूटी में मृत्यु पर मुआवज़ा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख किया गया है, जबकि अत्यंत संवेदनशील ड्यूटी में मृत्यु होने पर 75 हजार की जगह 1.50 लाख रुपए दिए जाएंगे। CM धामी ने स्थापना दिवस समारोह में इसकी घोषणा की।
पीआरडी जवान ये वही युवा हैं जो त्योहारों, चुनावों, आपदाओं और कार्यक्रमों में सबसे आगे खड़े होते हैं। अपनी जान की परवाह किए बिना ड्यूटी निभाते हैं। अब सरकार ने उनकी इस सेवा को सम्मान देने का बड़ा कदम उठाया है… पीआरडी जवानों के मुआवज़े में दोगुनी बढ़ोतरी, मुख्यमंत्री धामी का बड़ा एलान
उत्तराखंड के पीआरडी (प्रांतीय रक्षक दल) जवानों को अब सरकार पहले से अधिक सुरक्षा और सम्मान देगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीआरडी स्थापना दिवस समारोह में यह महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि ड्यूटी के दौरान किसी जवान की मृत्यु होने पर अब उनके परिवार को दोगुना तक मुआवज़ा दिया जाएगा।
पहले सामान्य ड्यूटी में मृत्यु पर 50 हजार रुपये और अत्यंत संवेदनशील ड्यूटी में मृत्यु पर 75 हजार रुपये दिए जाते थे। अब इन दोनों ही श्रेणियों में राशि बढ़ाकर क्रमशः 1 लाख और 1.50 लाख रुपये कर दी गई है।
सरकार के इस फैसले को पीआरडी जवानों की लंबी मांगों में बड़ी राहत माना जा रहा है। अत्यंत संवेदनशील ड्यूटी में जोखिम अधिक, इसलिए बढ़ाई गई राशि…
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पीआरडी जवान अक्सर ऐसी जिम्मेदार ड्यूटी में तैनात होते हैं जहाँ खतरा अधिक रहता है। जैसे:
•आपदा प्रबंधन
•पर्व-त्योहारों की सुरक्षा
•भीड़ नियंत्रण
•वीआईपी ड्यूटी
•संवेदनशील चुनावी ड्यूटी
ऐसे स्थानों पर जोखिम अधिक होने के कारण सरकार ने मुआवज़े की राशि 75 हजार से बढ़ाकर 1.5 लाख करने का निर्णय लिया है।
सामान्य ड्यूटी में भी बढ़ी सुरक्षा 50 हजार से 1 लाख
सामान्य ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर पीआरडी जवान के परिवार को मिलने वाली राशि भी अब 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख कर दी गई है।
यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि सरकार पीआरडी जवानों की भूमिका और योगदान को गंभीरता से पहचान रही है।
अंतिम संस्कार सहायता भी बढ़ाई 50 हजार तक का प्रावधान
समारोह में मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि यदि जवान की मृत्यु ड्यूटी के दौरान होती है, तो अंतिम संस्कार के लिए विशेष आर्थिक सहायता दी जाएगी।
अब परिवार को 50 हजार रुपये तक की अतिरिक्त राशि अंतिम संस्कार के लिए मिलेगी, ताकि कठिन समय में उन्हें आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
पीआरडी जवानों को सैन्य प्रशिक्षण का मौका आत्मनिर्भर सुरक्षा बल तैयार करने की दिशा में कदम
सरकार ने यह भी घोषणा की कि अब पीआरडी जवानों को मानक सैन्य प्रशिक्षण (Army Training Module) दिया जाएगा। इससे—
•उनकी क्षमताएँ बढ़ेंगी
•अनुशासन और दक्षता मजबूत होगी
•आपात स्थितियों में वे और अधिक प्रभावी सहायता दे सकेंगे
उत्तराखंड के हर कोने में पीआरडी की आवश्यकता बढ़ी
वर्तमान में 149 पीआरडी जवान शारीरिक रूप से प्रशिक्षित कर मुख्यालयों में तैनात किए गए हैं। सरकार ने बताया कि राज्य में पर्व सीजन, चुनावी गतिविधियाँ, आपदा नियन्त्रण और रोजमर्रा की सुरक्षा व्यवस्था में पीआरडी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इन्हें मजबूत बनाना राज्य की प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री धामी ने घोषणा की कि भविष्य में बल को और बड़ी जिम्मेदारियाँ दी जाएंगी और जवानों के लिए बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। पीआरडी जवान नज़र में भले सबसे अंतिम पंक्ति के प्रहरी हों, लेकिन जिम्मेदारी के मामले में वे सबसे आगे खड़े होते हैं। सरकार का यह फैसला दिखाता है कि उनकी क़ुर्बानी अब सुनी जा रही है और उनकी सेवा का सम्मान बढ़ रहा है। यह सिर्फ मुआवज़ा नहीं—बल्कि पीआरडी जवानों के सम्मान का मूल्य है।
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