ऑपरेशन सिंदूर, जिसने न केवल हमारे देश की सुरक्षा को मजबूती दी, बल्कि उन निर्दोष नागरिकों के प्रति हमारी संवेदनाओं को भी व्यक्त किया, जो जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले का शिकार हुए थे।
श्रीनिवास पोस्ती, श्री केदारनाथ धाम
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकवादी हमले में 28 निर्दोष लोग मारे गए, जिनमें 25 भारतीय पर्यटक और एक स्थानीय मुस्लिम शामिल थे। हमलावरों ने विशेष रूप से हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया, जिससे यह हमला सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने की साजिश प्रतीत हुआ। भारत सरकार ने इस हमले को पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का हिस्सा मानते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी।
भगवद गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा था : ‘परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।’ अर्थात, ‘साधुओं की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए मैं युग-युग में अवतार लेता हूं।’
इस श्लोक में भगवान ने यह स्पष्ट किया है कि जब भी धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब वह धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। ऑपरेशन सिंदूर भी इसी सिद्धांत का पालन करते हुए आतंकवादियों के खिलाफ एक निर्णायक कदम था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले के बाद भारतीय सेना को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकवादी शिविरों पर सटीक हवाई हमले करने का आदेश दिया। इस ऑपरेशन का नाम ’ऑपरेशन सिंदूर’ रखा गया, जो उन महिलाओं की याद में था जिन्होंने इस हमले में अपने पतियों को खो दिया था। इस नामकरण ने उन महिलाओं के प्रति हमारी संवेदनाओं और सम्मान को व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा था, ‘हमारी माताओं, बहनों और बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करने वालों को हम कभी माफ नहीं करेंगे।’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा और आतंकवादियों को उनके किए की सजा दिलवाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है। यह ऑपरेशन न केवल आतंकवाद के खिलाफ हमारी दृढ़ता का प्रतीक है, बल्कि उन परिवारों के प्रति हमारी संवेदनाओं का भी प्रतीक है जिन्होंने इस हमले में अपनों को खोया।
पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर की टू नेशन थ्योरी का हमारे देश भारत के द्वारा जो जवाब दिया गया उसने दुनिया को यह याद दिला दिया की हम कृष्ण और चाणक्य की संताने है जो दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिज्ञ है।
ब्रीफिंग का नेतृत्व दो महिला अधिकारियों द्वारा करने का निर्णय प्रतीकात्मक था, एक कर्नल सोफिया कुरैशी और दूसरी विंग कमांडर व्योमिका सिंह थी जो आतंकवाद से लड़ने के भारत के संकल्प को रेखांकित करता है, मारे गए लोगों की विधवाओं को श्रद्धांजलि देता है, तथा एकता और सांप्रदायिक सद्भाव का शक्तिशाली संदेश देता है।
शुरुआत से अंजाम तक पूरे ऑपरेशन सिंदूर की कमान उत्तराखंड के लाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने संभाली। एनटीआरओ की भी इसमें अहम भूमिका रही। एनएसए अजीत डोभाल ने स्पेशल टीम के साथ ऑपरेशन का नेतृत्व किया। ऑपरेशन के लिए बेहद खास टीम तैयार की गई और कंट्रोल रूम बनाया, जिसकी कमान पूरी तरह से एनएसए अजीत डोभाल के पास थी।
मैं भारतीय सेना के इस अद्भुत शौर्य के लिए भारतीय सेना को अपने दिल को गहराइयों से धन्यवाद देता हूं।








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