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गढ़वाल राइफल्स की पहल ‘सतत् मिलाप’

Garhwal Rifles‘सतत् मिलाप’, जिसका साहित्यक अर्थ है ’हमेशा संपर्क में रहना’, भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्स द्वारा की गई एक अनूठी पहल है, जिसकी कल्पना एवं शुरुआत तत्कालीन प्रभारी अभिलेख अधिकारी (वर्तमान में कर्नल ऑफ द गढ़वाल राइफल्स एवं उप थलसेनाअध्यक्ष) ले. जनरल शरतचंद, यूपीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम द्वारा वर्ष 2012 में की गई थी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के गौरव सेनानियों, वीर-नारियों एवं उनके आश्रितों तक पहुंचना, भारतीय सेना व भारत सरकार/राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम् नीतियों व विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देना, उनकी समस्याओं के बारे में जानना एवं उनका निवारण करना है।

योजना की फार्मेशन

इस अनूठी योजना को एक संस्था का रूप दिया गया है, जिसके लिए रेजीमेंट स्तर पर इसके संरक्षक स्वयं कर्नल ऑफ द गढ़वाल राइफल्स हैं। गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट केंद्र के कमांडेंट इसके चेयरमैन हैं। यह अभियान गढ़वाल राइफल्स के मुख्य अभिलेख अधिकारी  की देखरेख में संचालित होता है। यूनिट स्तर पर ‘सतत् मिलाप’  सेल के अध्यक्ष स्वयं कमान अधिकारी और एवं प्रभारी अधिकारी यूनिट के उपकमान अधिकारी होते हैं।

कैसे होता है काम

Satat Milap 2इस अभियान के तहत गढ़वाल क्षेत्र के सभी 7 जिलों को 21 सेक्टर में विभाजित किया गया है तथा प्रत्येक सेक्टर की जिम्मेदारी रेजीमेंट की एक बटालियन को सौंपी गई है। आमतौर पर एक सेक्टर में तीन से चार ब्लाक हैं, जहां एक ब्लाक प्रतिनिधि, जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के अधीन नियुक्त होता है। बटालियन के दल में एक जेसीओ, एक एनसीओ एवं एक लिपिक शामिल होता है, जो कि हर वर्ष अपने-अपने क्षेत्र में  दो बार भ्रमण करते हैं। प्रथम चरण का भ्रमण मई-जून एवं द्वितीय चरण माह अक्टूबर-नवम्बर में किया जाता है। ‘सतत् मिलाप’ दल अपनी-अपनी जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में लगभग 20-25 दिन व्यतीत करते हैं।

‘सतत् मिलाप’ के तहत भ्रमण बहुत ही संगठित तरीके से किया जाता है, जिसमें जिला सैनिक कल्याण कार्यालय सहित क्षेत्र की सभी संबंधित संस्थाओं से भी मदद ली जाती है।

मिलाप दल केवल समस्याओं को जानने एवं निवारण के लिए ही नही, अपितु भारतीय सेना व भारत सरकार/राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम नीतियों व विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में सभी भूतपूर्व सैनिकों, वीर-नारियों, विधवाओं एवं उनके आश्रितों को अवगत कराने का कार्य करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि वास्तविक लाभ गौरव सेनानियों, वीर-नारियों एवं उनके आश्रितों तक पहुंच रहे हैं। साथ ही भूतपूर्व सैनिकों, वीर-नारियों, विधवाओं एवं उनके आश्रितों को जहां सिविल अधिकारियों की मदद की आवश्यकता होती है, उन्हें प्रदान करवाई जाती हैं।

Satat Milap 3

अनूठी पहल की उपलब्धियां

विगत पांच वर्षों में इस अभियान के तहत लगभग रु 4.22 करोड का लाभ भूतपूर्व सैनिकों, वीर-नारियों, विधवाओं एवं उनके आश्रितों को दिलाया जा चुका है। अब तक लगभग 24 हजार भूतपूर्व सैनिकों, वीर-नारियों, विधवाओं एवं उनके आश्रितों से कम से कम एक बार मिलाप किया जा चुका है। गढ़वाल राइफल्स के अलावा दूसरी रेजीमेंट/कोर के 5636 भूतपूर्व सैनिकों, वीर-नारियों, विधवाओं एवं उनके आश्रितों से भी मिलाप किया जा चुका है एवं उनसे संबंधित 211 समस्याओं को उनके निवारण हेतु संबंधित अभिलेख कार्यालयों को भेजा जा चुका है।

वाई एस बिष्ट

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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