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देहरादून की पहाड़ियों में अब एक नई कहानी लिखी जा रही है साहस, आत्मनिर्भरता और आर्थिक आज़ादी की। जहां कभी महिलाएँ सिर्फ़ घर की ज़िम्मेदारियों तक सीमित थीं, अब वही महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ बनकर पूरे ज़िले की किस्मत बदलने निकल पड़ी हैं।
READ MOREदेहरादून में नियो मेट्रो के स्थान पर अब दूसरा रैपिड ट्रांजिट सिस्टम लाने की दिशा में बड़ा कदम उठा है। केंद्र सरकार की सलाह के बाद राज्य मंत्रिमंडल ने इस प्रणाली पर विस्तृत अध्ययन की मंजूरी दे दी है। शहर की बढ़ती आबादी, जाम और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए यह सिस्टम नियो मेट्रो से अधिक बेहतर और टिकाऊ माना जा रहा है। यह निर्णय देहरादून की ट्रैफिक कहानी में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
READ MOREउत्तराखंड सरकार ने एआई मिशन-2025 की दो अहम नीतियों एआई पॉलिसी और डेटा शेयरिंग पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इसका उद्देश्य तकनीक को पहाड़ों की जरूरतों के अनुसार ढालना और प्रदेश को आधुनिक डिजिटल भविष्य से जोड़ना है। राज्यपाल के निर्देशन में जारी इन नीतियों से डेटा साझा करना आसान होगा, शोध को बढ़ावा मिलेगा और एआई आधारित समाधान पहाड़ी जीवन को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होंगे।
READ MOREउत्तराखंड कैबिनेट ने ऐसे फैसले लिए हैं, जो सीधे आम लोगों के जीवन में बदलाव लाने वाले हैं। अब महिलाएँ रात में भी दुकान और प्रतिष्ठानों में काम कर सकेंगी, जबकि वन्यजीव संघर्ष में मौत होने पर 10 लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा। शिक्षक चयन-वेतनमान प्रस्ताव की वापसी, सहायक अभियोजन अधिकारी के 46 पदों का सृजन और पूर्व मंत्री दिवाकर भट्ट को श्रद्धांजलि ये सब मिलकर प्रदेश की प्रशासनिक तस्वीर को नया रूप देते हैं।
READ MOREउत्तराखंड पेयजल निगम में 2660 करोड़ की अनियमितताओं का खुलासा सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि व्यवस्था की खोखली पड़ चुकी रीढ़ का आईना है। RTI एक्टिविस्ट व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने सीएजी रिपोर्टों और वर्षों तक न हुए ऑडिट के आधार पर जो तथ्य सामने रखे, वे बताते हैं कि यह महज “लापरवाही” नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार है।
READ MOREउत्तराखंड कांग्रेस ने देहरादून स्थित कांग्रेस भवन में अपने वरिष्ठ नेताओं के लिए स्थायी बैठने की व्यवस्था कर दी है। प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य और करण माहरा जैसे नेताओं के लिए अलग कार्यालय बनाए गए हैं। संगठन में समन्वय, संवाद और गतिविधियों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह नया प्रबंधन लागू किया गया है।
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उत्तराखंड की पहाड़ों भरी धरती पर जहां खेती लंबे समय से जीवन का आधार रही है, वहीं अब आधुनिक बागवानी और नई फसलों की ओर भी लोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बदलाव की सबसे प्रेरणादायक मिसाल बनी हैं टिहरी जिले की रहने वाली सीता देवी, जिन्हें आज पूरे क्षेत्र में “कीवी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। अपनी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि पहाड़ की महिलाओं और किसानों के लिए भी एक नई राह खोल दी।
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उत्तराखंड की नदियाँ अवैध खनन के कारण भीतर से खोखली होती जा रही हैं। नदी तल से छेड़छाड़ ने बाढ़, भूस्खलन और गाँवों की असुरक्षा को बढ़ा दिया है। केदारनाथ से जोशीमठ तक की आपदाएँ चेतावनी हैं कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश भविष्य को संकट में डाल रहा है।
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