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उत्तराखंड में कीवी की खेती से बंजर खेतों की सेहत सुधरेगी और किसानों की आय बढ़ेगी। सरकार नई कीवी नीति के तहत 70 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है। लक्ष्य है कि 2030 तक 3500 हेक्टेयर क्षेत्र में कीवी के बागान विकसित किए जाएं।
READ MOREउत्तराखंड शासन ने शुक्रवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 15 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इस दौरान गृह सचिव बदले गए, फायर सर्विस और कारागार जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया गया। शासन के इस कदम को प्रशासनिक व्यवस्था को और चुस्त-दुरुस्त करने की कवायद माना जा रहा है।
READ MOREउत्तराखंड में राशनकार्ड धारकों के लिए बड़ी राहत—अब 54 लाख लोग मोबाइल ऐप से घर बैठे ई-केवाईसी कर सकेंगे। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने नई तकनीक शुरू की है, जिससे राशन डीलर की दुकानों पर लगने वाली भारी भीड़ खत्म होगी और आइरिस स्कैन से पहचान तुरंत संभव हो जाएगी।
READ MOREरामनगर के कोसी और दाबका नदी क्षेत्र में भूकंप से बड़ा भू-परिवर्तन संभव है। वैज्ञानिकों का मानना है कि किसी भी बड़े भूकंप की स्थिति में दाबका नदी का बहाव बदलकर कोसी से मिल सकता है। आईआईटी कानपुर और वैज्ञानिकों की नई स्टडी में फॉल्ट लाइन पर बड़े निर्माण को गंभीर खतरा बताया गया है।
READ MOREप्रदेश में राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया नए साल से पूरी तरह ऑनलाइन होने जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आवेदन से लेकर पात्रता जांच, सत्यापन, वितरण और राशन विक्रेताओं के भुगतान तक हर चरण डिजिटल हो। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को विभागीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
READ MOREदिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का सबसे अहम एलिवेटेड हिस्सा आधी रात से ट्रायल के लिए खोल दिया गया है। इसके खुलने से खेकरा से दिल्ली के अक्षरधाम तक सफर पहले से तेज़ और आसान होगा। अब दिल्ली से 32 किमी का रास्ता मिनटों में पूरा किया जा सकेगा। जल्द ही यह सड़क सहारनपुर तक भी जुड़ जाएगी, जिससे यात्रा में बड़ी राहत मिलेगी।
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उत्तराखंड की पहाड़ों भरी धरती पर जहां खेती लंबे समय से जीवन का आधार रही है, वहीं अब आधुनिक बागवानी और नई फसलों की ओर भी लोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बदलाव की सबसे प्रेरणादायक मिसाल बनी हैं टिहरी जिले की रहने वाली सीता देवी, जिन्हें आज पूरे क्षेत्र में “कीवी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। अपनी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि पहाड़ की महिलाओं और किसानों के लिए भी एक नई राह खोल दी।
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उत्तराखंड की नदियाँ अवैध खनन के कारण भीतर से खोखली होती जा रही हैं। नदी तल से छेड़छाड़ ने बाढ़, भूस्खलन और गाँवों की असुरक्षा को बढ़ा दिया है। केदारनाथ से जोशीमठ तक की आपदाएँ चेतावनी हैं कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश भविष्य को संकट में डाल रहा है।
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