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गढ़वाल और कुमाऊँ में होली का उल्लास अपने चरम पर पहुँच चुका है। वास्तविक होली से एक दिन पहले ही पहाड़ के गाँवों में उत्सव का रंग साफ दिखाई दे रहा है। शाम ढलते ही चौपालों और मंदिर प्रांगणों में लोग एकत्रित हो रहे हैं और बैठक होली की मधुर स्वर लहरियाँ गूंज रही हैं। ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की संगत में पारंपरिक होली गीत गाए जा रहे हैं।
READ MOREउत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से उठी न्याय की एक आवाज अब देश की राजधानी तक पहुंचने की राह पर है। एक ओर जहां देश के जवान सीमाओं पर तैनात होकर राष्ट्र की सुरक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार के लोग अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
READ MOREकपिल शर्मा ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया है। पॉलीहाउस के माध्यम से संरक्षित खेती, ड्रिप सिंचाई प्रणाली, उन्नत किस्म के बीज और जैविक उर्वरकों के संतुलित उपयोग से उन्होंने कम लागत में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हासिल किया।
READ MOREउत्तराखंड के जोशीमठ में वर्ष 2023 की शुरुआत में सामने आई भू-धंसाव त्रासदी के बाद अब स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। नृसिंह मंदिर मार्ग पर विधिवत भूमि पूजन के साथ भूस्थिरीकरण (ग्राउंड स्टेबलाइजेशन) कार्य का शुभारंभ किया गया। यह कदम लंबे इंतजार और व्यापक तकनीकी अध्ययन के बाद उठाया गया है, जिससे प्रभावित नागरिकों में उम्मीद की नई किरण जगी है।
READ MOREगढ़वाल और कुमाऊँ में होली का उल्लास अपने चरम पर पहुँच चुका है। वास्तविक होली से एक दिन पहले ही पहाड़ के गाँवों में उत्सव का रंग साफ दिखाई दे रहा है। शाम ढलते ही चौपालों और मंदिर प्रांगणों में लोग एकत्रित हो रहे हैं और बैठक होली की मधुर स्वर लहरियाँ गूंज रही हैं। ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की संगत में पारंपरिक होली गीत गाए जा रहे हैं।
READ MOREउत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में बसंत पंचमी के आते ही होल्यारों का उत्साह देखने योग्य होता है। महाशिव रात्रि से खड़ी होली शुरू हो जाती है। रंग एकादशी के दिन चीर बांधी जाती है। एकादशी से होली का त्योहार पूरे सवाब पर चढ़ जाता है। महिला व पुरुष समूह कदमताल करते गीतों में झूमते नजर आते हैं।
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गढ़वाल और कुमाऊँ में होली का उल्लास अपने चरम पर पहुँच चुका है। वास्तविक होली से एक दिन पहले ही पहाड़ के गाँवों में उत्सव का रंग साफ दिखाई दे रहा है। शाम ढलते ही चौपालों और मंदिर प्रांगणों में लोग एकत्रित हो रहे हैं और बैठक होली की मधुर स्वर लहरियाँ गूंज रही हैं। ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की संगत में पारंपरिक होली गीत गाए जा रहे हैं।
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उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से उठी न्याय की एक आवाज अब देश की राजधानी तक पहुंचने की राह पर है। एक ओर जहां देश के जवान सीमाओं पर तैनात होकर राष्ट्र की सुरक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार के लोग अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
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