[fvplayer id=”10″]
सांस्कृतिक संस्था पर्वतीय कला केंद्र द्वारा संस्था के संस्थापक तथा रंगमंच जगत के सुप्रसिद्ध संगीतकार स्व. मोहन उप्रेती के 98वें जन्मदिवस पर संस्था की 58 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित स्मारिका का लोकार्पण तथा उनके द्वारा गीत-नाट्यों और नाटकों का प्रभावशाली एवं मनमोहक मंचन किया गया।
READ MOREऐपण बचपन से उनके जीवन का हिस्सा रहा है। त्योहारों, पूजा-अनुष्ठानों और पारिवारिक आयोजनों में घर की महिलाओं को पारंपरिक लाल गेरू और चावल के घोल से सुंदर आकृतियां बनाते देख उन्होंने इस कला को सीखा। समय के साथ उन्होंने इसे केवल पारंपरिक आंगन और चौकी तक सीमित न रखकर कैनवास, लकड़ी की प्लेट, दीवार सज्जा, उपहार सामग्री और कॉर्पोरेट गिफ्ट आइटम्स तक विस्तार दिया।
READ MOREमालू के पत्तों में लिपटी सिंगोड़ी पर्यावरण-अनुकूल पारंपरिक सोच का भी प्रतीक है। आज जब प्लास्टिक और कृत्रिम पैकेजिंग पर्यावरण के लिए खतरा बन चुकी है, तब सिंगोड़ी जैसी मिठाई हमें प्रकृति के साथ संतुलन में जीने की सीख देती है।
READ MORE30 साल पैरा SF में सेवा के बाद कमांडो हीरा सिंह पटवाल अल्मोड़ा के अपने गांव लौटे। बंजर ज़मीन को खेती में बदला, पशुपालन शुरू किया और आत्मनिर्भरता की मिसाल बने। वे युवाओं को गांव लौटने, खेती अपनाने और पहाड़ बचाने का संदेश दे रहे हैं।
READ MOREशंकर बिष्ट का यह कार्य पहाड़ों के युवाओं के लिए एक मजबूत संदेश है — कि बदलाव लाने के लिए बड़े पद, धन या राजनीतिक ताकत की नहीं, बल्कि साफ नीयत और निरंतरता की जरूरत होती है।
READ MOREकोटद्वार क्षेत्र में लंबे समय से दहशत फैलाने वाला गुलदार आखिरकार वन विभाग की कार्रवाई में पिंजरे में कैद हो गया। गुलदार ने महिलाओं और मवेशियों पर हमले किए थे। ट्रैंकुलाइज कर उसे रेस्क्यू सेंटर भेजा गया, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
READ MORE


[fvplayer id=”10″]

सांस्कृतिक संस्था पर्वतीय कला केंद्र द्वारा संस्था के संस्थापक तथा रंगमंच जगत के सुप्रसिद्ध संगीतकार स्व. मोहन उप्रेती के 98वें जन्मदिवस पर संस्था की 58 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित स्मारिका का लोकार्पण तथा उनके द्वारा गीत-नाट्यों और नाटकों का प्रभावशाली एवं मनमोहक मंचन किया गया।
READ MORE
ऐपण बचपन से उनके जीवन का हिस्सा रहा है। त्योहारों, पूजा-अनुष्ठानों और पारिवारिक आयोजनों में घर की महिलाओं को पारंपरिक लाल गेरू और चावल के घोल से सुंदर आकृतियां बनाते देख उन्होंने इस कला को सीखा। समय के साथ उन्होंने इसे केवल पारंपरिक आंगन और चौकी तक सीमित न रखकर कैनवास, लकड़ी की प्लेट, दीवार सज्जा, उपहार सामग्री और कॉर्पोरेट गिफ्ट आइटम्स तक विस्तार दिया।
READ MORE