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ऐसे में पंचायती राज सचिव की ओर से चुनावी अधिसूचना 21 जून को जारी होने के बाद अब जिला निर्वाचन अधिकारी 23 जून को चुनाव की सूचना जारी करेंगे। जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश में दो चरणों में पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। साथ ही 19 जुलाई को एक साथ मतगणना होगी।
READ MOREराज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड जैसी आध्यात्मिक और प्राकृतिक भूमि पर योग का अभ्यास विशेष महत्व रखता है। उन्होंने इस अवसर पर युवाओं से आह्वान किया कि वे योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और स्वस्थ भारत के निर्माण में योगदान दें।
READ MOREयोग का अर्थ ही है “जोड़ना” — शरीर से मन, मन से आत्मा और आत्मा से परम चेतना तक। जब हम योग को अपनाते हैं, तो हमारे भीतर एक चार-स्तरीय संतुलन स्थापित होता है
READ MOREफिलहाल शासन स्तर पर त्रिस्तरीय चुनाव के कार्यक्रमों की रूपरेखा पर मंथन शुरू हो गया है। संभावना जताई जा रही है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव दो चरणों में कराया जाएगा
READ MOREउन्होंने भविष्य में बिना अवकाश लिये गायब रहने वाले चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टॉफ के खिलाफ सख़्त कार्रवाई अमल में लाने के लिये जनपद स्तर पर मुख्य चिकित्साधिकारियों को भी निर्देशित किया
READ MOREफसलों की सुरक्षा को लेकर लगाई गई सोलर फेंसिंग वर्तमान में वन निगम के लकड़ी परिवहन करने वाले वाहनों ने बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दी गई है जिसके चलते शाम ढलते ही हाथियों का झुंड उनके खेतों में घुसकर उनकी फसलों को रौंद रहा है
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विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की पवित्रता और हिमालयी पर्यावरण की रक्षा के लिए चलाया जा रहा ‘कैरी मी बैक’ अभियान लगातार सफलता की नई कहानी लिख रहा है। जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयास से संचालित इस अनूठी पहल के तहत अब तक करीब दो टन कचरा केदारनाथ धाम से नीचे गौरीकुंड तक लाया जा चुका है। अभियान को श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे केदारनाथ यात्रा मार्ग पर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का सकारात्मक माहौल बन रहा है।
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उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक आंदोलनों और ऐतिहासिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। आगामी जुलाई से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले देशभर के विद्यार्थियों को उत्तराखंड के प्रमुख समाज सुधारक और आंदोलनकारी स्वामी मन्मथन के जीवन, विचारों और योगदान का अध्ययन कराया जाएगा।
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