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जनरल बिपिन रावत का जीवन राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और अदम्य साहस का प्रतीक है। उनकी दूरदर्शिता और सुधारात्मक पहलें आने वाले वर्षों में भी भारतीय सशस्त्र बलों को दिशा देती रहेंगी।
READ MOREगढ़वाल के दूरस्थ इलाकों में महंगे फोटोग्राफरों की सेवाएं आम लोगों की पहुंच से बाहर होती हैं। ऐसे में सोहन रावत ने सस्ती, भरोसेमंद और पेशेवर सेवाएं देकर लोगों का विश्वास जीता। उनकी मेहनत और लगन का परिणाम है कि आज उनका व्यवसाय निरंतर प्रगति कर रहा है।
READ MOREसांस्कृतिक संस्था पर्वतीय कला केंद्र द्वारा संस्था के संस्थापक तथा रंगमंच जगत के सुप्रसिद्ध संगीतकार स्व. मोहन उप्रेती के 98वें जन्मदिवस पर संस्था की 58 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित स्मारिका का लोकार्पण तथा उनके द्वारा गीत-नाट्यों और नाटकों का प्रभावशाली एवं मनमोहक मंचन किया गया।
READ MOREसीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि युवाओं को उत्कृष्टता की ओर निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए और अपने पेशे को केवल करियर के रूप में नहीं, बल्कि सेवा के माध्यम के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा ‘समर्पण और सेवा भाव ही किसी भी पेशे को महान बनाते हैं’।
READ MOREसीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल वर्दीधारी अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सामरिक सोच को जन-जन तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति व्यापक जन-जागरूकता विकसित हो सके।
READ MOREउत्तराखंड में पर्यटन बीते कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है। चारधाम यात्रा, हिल स्टेशनों और प्राकृतिक स्थलों पर रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। पहली नज़र में यह आर्थिक दृष्टि से सकारात्मक प्रतीत होता है, परंतु प्रश्न यह है कि क्या केवल बढ़ती संख्या ही विकास का सही संकेतक है? या फिर अब समय आ गया है कि हम पर्यटन की गुणवत्ता, प्रबंधन और स्थायित्व पर गंभीरता से विचार करें।
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उत्तराखंड में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए आज से ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य के पर्यटन विभाग ने यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। श्रद्धालु सुबह 7 बजे से आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।
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गढ़वाल और कुमाऊँ में होली का उल्लास अपने चरम पर पहुँच चुका है। वास्तविक होली से एक दिन पहले ही पहाड़ के गाँवों में उत्सव का रंग साफ दिखाई दे रहा है। शाम ढलते ही चौपालों और मंदिर प्रांगणों में लोग एकत्रित हो रहे हैं और बैठक होली की मधुर स्वर लहरियाँ गूंज रही हैं। ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की संगत में पारंपरिक होली गीत गाए जा रहे हैं।
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