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रामनगर सीट के लिए हरीश रावत को खुली चुनौती दे रहे रणजीत रावत को पार्टी ने सल्ट विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने चौबट्टाखाल सीट केसर सिंह नेगी को मैदान मे उतार दिया है। इसलिए अब यह लगभग तय हो गया है कि पार्टी हरक सिंह रावत को मैदान में नहीं उतारेगी।
READ MOREकांग्रेस पर कई जगह सीटों को ‘बेचने’ तक के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस अब 11 उम्मीदवारों की सूची में परिवर्तन करने जा रही है। यही वजह है कि पार्टी ने दूसरी लिस्ट के प्रत्याशियों को पार्टी सिंबल नहीं बांटे। बुधवार को पार्टी की संशोधित लिस्ट आ सकती है।
READ MOREसबसे अहम है कि चर्चा का केंद्र बनी लैंसडाउन, डोईवाला, चौबट्टाखाल, रामनगर और सल्ट विधानसभा सीट पर प्रत्याशी घोषित नहीं किए गए हैं। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि लंबी जद्दोजहद के बाद पार्टी में वापसी करने वाले हरक सिंह को डोईवाला या चौबट्टाखाल में से किसी सीट से लड़ाया जा सकता है। वहीं लैंसडाउन से उनकी बहू अनुकृति गुसाईं को टिकट दिया जा सकता है।
READ MOREयमकेश्वर से विधायक ऋतु खंडूरी का टिकट कटा, 10 सीटों पर बदले गए प्रत्याशी, खानपुर से कुंवर प्रणव चैंपियन की पत्नी को मिला टिकट। श्रीनगर से डा. धन सिंह रावत, चौबट्टाखाल से सतपाल महाराज, लैंसडाउन से दलीप सिंह रावत, धारचूला से धन सिंह धामी, डीडीहाट से बिशन सिंह चुफाल, पिथौरागढ़ से चंद्रा पंत, गंगोलीहाट से फकीर राम टम्टा, कपकोट से सुरेश गड़िया को मैदान में उतारा गया।
READ MOREयह तो तय था कि हरक सिंह की कांग्रेस में वापसी को लेकर एक वर्ग का तीखा विरोध है। हरीश रावत को अब भी वह टीस कचोटती है कि हरक ने अब भाजपाई हो चुके पूर्व कांग्रेसियों के साथ मिलकर उनकी सरकार को गिराने की साजिश रची। वह लगातार यह कह रहे हैं कि हरक ‘लोकतंत्र की हत्या’ के दोषी है। इसी प्वाइंट पर वह हरक की वापसी पर वीटो लगा रहे हैं।
READ MOREलंबे समय से अपनी बहू अनुकृति गुसाईं के लिए टिकट मांग रहे हरक सिंह कई बार बगावती तेवर दिखा चुके थे। वह अपनी बहू को लैंसडाउन विधानसभा से मैदान में उतारना चाह रहे थे। इसके साथ ही अपनी कोटद्वार विधानसभा सीट बदलने का भी दबाव बना रहे थे। यही नहीं उन्होंने कोटद्वार के बदले में डोईवाला, रुद्रप्रयाग समेत पांच सीटों का विकल्प पार्टी को दिया था।
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मधुमक्खी सिर्फ शहद नहीं देती, वह हमारे पूरे पर्यावरण की रक्षक है। लगभग 75 प्रतिशत खाद्य फसलों का परागण मधुमक्खियों के माध्यम से होता है। यदि मधुमक्खियां सुरक्षित रहेंगी तो पहाड़, कृषि और जैव विविधता सभी सुरक्षित रहेंगे। हर युवा को मधुमक्खी संरक्षण को पर्यावरण संरक्षण का मिशन बनाना चाहिए।
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2000 से ज्यादा मेडिकल स्टोर बंद, दवा के लिए दिनभर भटकते रहे मरीज और तीमारदार, देहरादून समेत पूरे प्रदेश में बुधवार को दवा कारोबारियों की हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के विरोध में उत्तरांचल औषधि व्यवसायी महासंघ के आह्वान पर राजधानी दून, विकासनगर, मसूरी और श्रीनगर गढ़वाल सहित कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। अचानक बंद हुई दवा दुकानों के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई लोग जरूरी दवाइयों के लिए अस्पतालों और बाजारों में घंटों भटकते रहे।
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