UTDB द्वारा ‘लैंगिक समानता एवं कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन

UTDB द्वारा ‘लैंगिक समानता एवं कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन

उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) ने परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU), परियोजना प्रबंधन, डिज़ाइन एवं पर्यवेक्षण परामर्शदाता (PMDSC) तथा इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (IHM) के सहयोग से “लैंगिक समानता एवं कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम (POSH)” विषय पर एक अर्द्ध-दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया।

यह कार्यशाला एशियाई विकास बैंक (ADB) सहयोगित “सस्टेनेबल, इनक्लूसिव, क्लाइमेट रेज़िलिएंट टूरिज़्म डेवलपमेंट एट टिहरी लेक एरिया” परियोजना के अंतर्गत आयोजित की गई। महिला एवं बाल विकास विभाग — जो राज्य में POSH अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु नोडल एजेंसी है — के प्रतिनिधियों ने भी इस कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी की।

पर्यटन सचिव ने व्यक्त की प्रतिबद्धता

पर्यटन सचिव धीरज गर्ब्याल ने पर्यटन क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। उन्होंने कहा कि “उत्तराखंड को POSH अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से एक उदाहरणात्मक राज्य के रूप में स्थापित किया जाएगा।”

बी.एल. राणा, एसीईओ, UTDB ने कार्यक्रम के उद्देश्य की सराहना करते हुए कहा कि परिषद POSH अधिनियम के सिद्धांतों पर आधारित सुरक्षित और समान अवसर वाले कार्यक्षेत्र के निर्माण के लिए दृढ़ संकल्पित है।

कार्यशाला का शुभारंभ और उद्देश्य

कार्यशाला का शुभारंभ पूनम चंद, अपर निदेशक एवं अध्यक्ष, UTDB POSH समिति द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि “महिलाओं की कार्यबल में सहभागिता के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण इस कार्यशाला की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा। राज्यभर में इस प्रकार की सार्थक पहलों को आगे बढ़ाने में एडीबी का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।”

इस कार्यशाला में कुल 52 प्रतिभागियों — जिनमें UTDB के अधिकारी, होटल एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष, होटल प्रबंधन संस्थानों के संकाय सदस्य, छात्र-छात्राएं एवं अन्य हितधारक शामिल थे जिन्होंने इस कार्यक्रम में सहभागिता की।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य परियोजना हितधारकों, शैक्षणिक संस्थानों एवं पर्यटन विभाग के अधिकारियों में जागरूकता बढ़ाना, तथा कार्यस्थल को सुरक्षित, सम्मानजनक और उत्पीड़न-मुक्त बनाना था। प्रतिभागियों को “परिवर्तन के वाहक (चैंपियन)” के रूप में आगे आने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि पर्यटन क्षेत्र में सम्मानजनक एवं समावेशी कार्य-संस्कृति विकसित की जा सके।

सहभागिता और संवाद

कार्यशाला को अधिक सहभागितापूर्ण बनाने हेतु प्रश्नोत्तरी, कहानी-कथन, वीडियो प्रस्तुति एवं समूह चर्चा जैसे इंटरैक्टिव माध्यमों का उपयोग किया गया।

राज्य के प्रमुख होटल प्रतिष्ठानों — JW मैरियट, ताज मसूरी, जेपी होटल, सेवॉय होटल मसूरी, और द फ़र्न ब्रेंटवुड — के प्रतिनिधियों ने भी अपने संस्थानों में POSH अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने आंतरिक शिकायत समितियों के गठन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और नियमित समीक्षा पर विशेष बल दिया।

ताज होटल के प्रतिनिधि ने बताया कि उनके प्रतिष्ठान में महिलाओं की 30% भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिससे कार्यस्थल में विविधता और संतुलन को बढ़ावा मिल रहा है।

प्रस्तुतियां और समापन

कार्यक्रम में डॉ. रीता मोहन एवं तरुणा चमोली, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सूचनात्मक प्रस्तुति दी गई।

कार्यक्रम निदेशक अभिषेक रोहिला ने कहा कि “यह प्रशिक्षण केवल शुरुआत है, भविष्य में इस प्रकार के और भी कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।”

टीम लीडर, PMDSC (टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स) ने परियोजना की जानकारी साझा करते हुए बताया कि “सामाजिक, पर्यावरणीय एवं लैंगिक समानता — इस परियोजना के तीन प्रमुख स्तंभ हैं।”

कार्यक्रम के अंत में पूनम चंद, अपर निदेशक, UTDB ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। राजेश कुमार पंत, अतिरिक्त कार्यक्रम निदेशक, PMU (ADB परियोजना) ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि “UTDB द्वारा की जा रही पहलें पर्यटन क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रही हैं।”

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