उत्तराखंड में कोरोना के केस काफी कम आने लगे हैं, जो राहत की बात है। हालांकि सामाजिक दूरी का पालन और दूसरी गाइडलाइंस का पालन आगे भी करते रहना होगा क्योंकि कोरोना अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। इस बीच, एक नया खतरा सिर उठाने लगा है।
जी हां, राज्य में मॉनसून की दस्तक के साथ ही डेंगू का खतरा भी बढ़ गया है। इसे देखते हुए नगर निगम देहरादून ने डेंगू की रोकथाम के लिए अभी से प्रभावी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जिन क्षेत्रों में निगम की बड़ी मशीनें नहीं पहुंच पाती हैं, वहां ड्रोन से फागिंग कराई जा रही है।
आपको बता दें कि जून से लेकर नवंबर तक डेंगू फैलने का ज्यादा खतरा रहता है। कोरोना संक्रमण के खिलाफ प्रदेश पहले से ही लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन एक और मोर्चे पर टेंशन बढ़ाना नहीं चाहता। सरकार की ओर से अप्रैल में ही जिलाधिकारियों को निर्देश दे दिए गए थे कि डेंगू से बचाव व रोकथाम के लिए संबंधित विभागों का सहयोग लेकर नोडल अधिकारी नामित किए जाएं।
डेंगू वायरस से बुखार होता है और इलाज समय पर करना जरूरी होता है। मच्छर डेंगू वायरस को फैलाते हैं। डेंगू बुखार को हड्डीतोड़ बुख़ार के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इससे पीड़ित लोगों को इतना अधिक दर्द हो सकता है कि जैसे उनकी हड्डियां टूट गई हों। इसके कुछ लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते तथा मांसपेशियों व जोड़ों का दर्द शामिल है।
बचाव की बात करें तो लोग अपने को मच्छरों से बचा सकते हैं और उनसे काटे जाने की संख्या को सीमित कर सकते हैं। वैज्ञानिक मच्छरों के पनपने की जगहों को कम करने को कहते हैं।


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