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    EDITOR

    Y S Bisht

    लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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  • राष्ट्रीय बीज निगम के सीएसडी ने कृषि मंत्री को सौंपा लाभांश का चैक

    राष्ट्रीय बीज निगम के सीएसडी ने कृषि मंत्री को सौंपा लाभांश का चैक0

    पूसा के राष्ट्रीय बीज भवन पर राष्ट्रीय बीज निगम लि. (भारत सरकार का उपक्रम ‘मिनी रत्न’ कंपनी) ने भारत सरकार के कृषि मंत्री को 8 करोड़, 97 लाख, 58 हजार, 722 रूपए लाभांश का चैक सौंपा। यह चैक विनोद कुमार गौड़, सीएमडी, एनएससी ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, कृषि राज्य मंत्री परषोत्तम रूपाला और कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी को सौंपा।

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  • …चीन सरहद पर हिमवीर तैनात, ऊंचे सीमांत इलाके शीतकाल में भी गुलजार

    …चीन सरहद पर हिमवीर तैनात, ऊंचे सीमांत इलाके शीतकाल में भी गुलजार0

    चीन से सटी सीमा पर भारतीय सेना, आईटीबीपी और एसएसबी की हलचल बढ़ने के बाद इस साल सीमांत गांवों में भी खासी हलचल है। गुंजी, लिपुलेख सहित कई अन्य स्थानों पर स्थानीय लोगों के रेस्टोरेंट खुले हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी सुधर रही है। इसके अलावा लिपुलेख तक सड़क बनने के बाद आवागमन भी बढ़ा है। ऐसे में सीमा से सटे व्यास घाटी के गांवों में प्रवास पर गए अधिकांश परिवार व्यापारिक गतिविधियों के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ही रहेंगे। यह पहला मौका है, जब चीन सीमा पर स्थित गांवों में 10-12 फुट बर्फ होने के बाद भी रौनक है।

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  • उत्तराखंड में पनीर वाला गांव ‘रौतू की बेली’

    उत्तराखंड में पनीर वाला गांव ‘रौतू की बेली’0

    पहले हमारे गांव में 30 से 40 परिवार ही पनीर बनाते थे लेकिन अब सभी परिवार पनीर का व्यवसाय कर रहे हैं। हर परिवार से दो से चार किलो प्रतिदिन पनीर का उत्पादन होता है जिससे कि यहां के लोगों के जीवन में काफी सुधार हो रहा है और यहां के युवा रोजगार की तलाश में गांव से बाहर नहीं जाते और वह अपने ही गांव में रहकर रोजगार कर रहे हैं।

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  • लद्दाख में चीनी सेना के सामने डटे हैं गढ़वाल राइफल्स के शूरवीर

    लद्दाख में चीनी सेना के सामने डटे हैं गढ़वाल राइफल्स के शूरवीर0

    लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प को चार महीने का समय पूरा हो चुका है। तब से लेकर अब तक लद्दाख सीमा पर भारत और चीन की सेनाएं युद्ध के लिए तैयार बैठी हैं। लेह से 200 किलोमीटर दूर पूर्वी लद्दाख के चुमार डेमचौक सीमा पर भारतीय सेना के जवान और टैंक चीन के छक्के छुड़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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