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महाविद्यालय के विकसित भारत संकल्प क्लब द्वारा बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर तीन विशेष कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। पूरे महाविद्यालय परिसर में सकारात्मक, उत्साहपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण देखने को मिला।
READ MOREहिमालय की ऊंचाइयों पर जब बर्फ पिघलती है, तो सिर्फ ग्लेशियर ही नहीं बदलते, हमारी सच्चाई भी सामने आती है। उन दुर्गम पहाड़ों पर, जहां शुद्धता और शांति का वास माना जाता है, वहीं इंसान ने अपने पीछे कचरे के ढेर छोड़ दिए हैं। प्लास्टिक की बोतलें, रैपर, टूटी चप्पलें और इस्तेमाल किए गए टेंट, यह सब किसी आपदा के बाद नहीं, बल्कि हमारे ‘घूमने’ के बाद बचा हुआ सच है।
READ MORE30 साल पैरा SF में सेवा के बाद कमांडो हीरा सिंह पटवाल अल्मोड़ा के अपने गांव लौटे। बंजर ज़मीन को खेती में बदला, पशुपालन शुरू किया और आत्मनिर्भरता की मिसाल बने। वे युवाओं को गांव लौटने, खेती अपनाने और पहाड़ बचाने का संदेश दे रहे हैं।
READ MOREटिहरी जिले के स्यांड़ी गांव की महिलाओं ने पहाड़ के शुद्ध पानी को रोजगार का साधन बना लिया है। ‘देवभूमि शुद्ध धारा’ नाम से मिनरल वाटर प्लांट शुरू कर 11 महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं। यह पहल स्थानीय रोजगार और जल संरक्षण का सशक्त उदाहरण है।
READ MOREदेहरादून में सड़क खुदाई को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। अब रात में खुदाई करने पर सुबह तक सड़क भरकर चलने लायक बनाना अनिवार्य होगा। 10 विभागों के 85 कार्यों को सशर्त अनुमति दी गई है। नियम तोड़ने पर एफआईआर तक की कार्रवाई हो सकती है।
READ MOREदून अस्पताल और सेफड़ू द्वारा किए गए शोध में सामने आया है कि आंखों के ऑपरेशन के दौरान शेरॉन चीरा तकनीक अपनाने से चश्मे का नंबर बढ़ने की संभावना कम हो जाती है। 100 मरीजों पर किए गए अध्ययन में यह तकनीक सबसे प्रभावी साबित हुई।
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महाविद्यालय के विकसित भारत संकल्प क्लब द्वारा बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर तीन विशेष कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। पूरे महाविद्यालय परिसर में सकारात्मक, उत्साहपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण देखने को मिला।
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हिमालय की ऊंचाइयों पर जब बर्फ पिघलती है, तो सिर्फ ग्लेशियर ही नहीं बदलते, हमारी सच्चाई भी सामने आती है। उन दुर्गम पहाड़ों पर, जहां शुद्धता और शांति का वास माना जाता है, वहीं इंसान ने अपने पीछे कचरे के ढेर छोड़ दिए हैं। प्लास्टिक की बोतलें, रैपर, टूटी चप्पलें और इस्तेमाल किए गए टेंट, यह सब किसी आपदा के बाद नहीं, बल्कि हमारे ‘घूमने’ के बाद बचा हुआ सच है।
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