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गोरखपुर के सैनिक स्कूल में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बांटने वाली राजनीति से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग देश को कमजोर करने की साजिश करते हैं। सीएम ने देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत के नाम पर बने भव्य ऑडिटोरियम का उद्घाटन किया और उनकी प्रतिमा का अनावरण करते हुए राष्ट्र सेवा में उनके योगदान को याद किया।
READ MOREउत्तराखंड में मूल निवास भू कानून की मांग फिर तेज हो गई है। फर्जी स्थायी निवासी प्रमाणपत्रों और भूमि के व्यावसायिक दोहन को लेकर मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति ने देहरादून के गांधी पार्क में धरना दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पहाड़ों की कृषि योग्य जमीन तेजी से बाहरियों के कब्जे में जा रही है, जो राज्य के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है।
READ MOREपिथौरागढ़ में 2020 में लिए गए पतंजलि गाय घी के नमूने जांच में फेल पाए गए हैं। राज्य और राष्ट्रीय लैब दोनों में घी मानकों पर खरा नहीं उतरा। 1348 दिन चली प्रक्रिया के बाद न्याय निर्णायक अधिकारी ने पतंजलि आयुर्वेद समेत डिस्ट्रीब्यूटर और दुकानदार पर कुल 1.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। विभाग ने लोगों को उत्पाद सावधानी से खरीदने की सलाह दी है।
READ MOREउत्तराखंड में शिक्षक भर्ती को लेकर एक संवेदनशील मामला सामने आया है। दूसरे राज्यों से आई बहुओं ने पति की जाति आधारित आरक्षण श्रेणी पर आवेदन किया, लेकिन जांच में सामने आया कि शादी मात्र से आरक्षण का अधिकार नहीं मिलता। कई जिलों में ऐसी महिला अभ्यर्थियों के दस्तावेज़ों की पड़ताल की गई और शासन ने साफ़ किया कि ऐसे मामलों में आरक्षण लागू नहीं होगा।
READ MOREइस अक्टूबर, नंदाकिनी घाटी में हुई तबाही को भूविज्ञान विशेषज्ञ प्रो. महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट ने बेहद नज़दीक से देखा। दशकों से पहाड़ों को पढ़ने-समझने वाले बिष्ट बताते हैं कि यह आपदा प्रकृति के क्रोध से नहीं, बल्कि हमारी अनियंत्रित बसावट, लालच और वैज्ञानिक चेतावनियों की अनदेखी का नतीजा है। घाटी बार-बार संकेत देती है, क्या हम सुनेंगे?
READ MOREउत्तराखंड अपनी 25वीं वर्षगांठ मना रहा है। दो दशक से अधिक बीतने के बाद भी बेरोज़गारी, पेपर लीक और पलायन जैसी समस्याएँ जस की तस हैं। जहाँ एक ओर विकास की चमक दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ों की वास्तविकता अब भी अंधेरे में है।
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महाविद्यालय के विकसित भारत संकल्प क्लब द्वारा बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर तीन विशेष कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। पूरे महाविद्यालय परिसर में सकारात्मक, उत्साहपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण देखने को मिला।
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हिमालय की ऊंचाइयों पर जब बर्फ पिघलती है, तो सिर्फ ग्लेशियर ही नहीं बदलते, हमारी सच्चाई भी सामने आती है। उन दुर्गम पहाड़ों पर, जहां शुद्धता और शांति का वास माना जाता है, वहीं इंसान ने अपने पीछे कचरे के ढेर छोड़ दिए हैं। प्लास्टिक की बोतलें, रैपर, टूटी चप्पलें और इस्तेमाल किए गए टेंट, यह सब किसी आपदा के बाद नहीं, बल्कि हमारे ‘घूमने’ के बाद बचा हुआ सच है।
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