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तेजी से सोने की बढ़ती कीमतों के बीच, उत्तराखंड के एक गांव की पंचायत ने एक अनोखा फैसला लिया है, अब शादी या पारिवारिक आयोजनों में महिलाएं सिर्फ तीन गहने ही पहन सकेंगी, जिनमें नथ, कान की बाली और मंगलसूत्र शामिल हैं। पंचायत का मानना है कि यह कदम दिखावे की होड़ और आर्थिक बोझ को कम करने में मदद करेगा।
READ MOREउत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य के हर ज़िले में वृद्धाश्रम खोलने की हालिया घोषणा ने मुझे, एक समाजशास्त्री के रूप में, यह सोचने पर विवश किया कि क्या वास्तव में पहाड़ी समाज को वृद्धाश्रमों की आवश्यकता है? खासकर तब जब यहां परिवार का अर्थ केवल माता-पिता और बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विस्तृत रिश्तों की जड़ से जुड़ी व्यवस्था है ।
READ MOREधार्मिक नगरी चित्रकूट में संत तुलसीदास के जयंती समारोह (तुलसी जयंती) में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 500 वर्ष पूर्व जब इस गांव की स्थिति शायद साधनों के अभाव और कठिनाइयों से ग्रस्त रही होगी, ऐसे समय में एक दिव्य आत्मा ने जन्म लिया और बाल्यावस्था में ही प्रभु श्रीराम के चरणों में स्वयं को समर्पित कर दिया।
READ MOREमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट से बिजनौर तक हेलीकॉप्टर द्वारा पूरे यात्रा मार्ग का वृहद सर्वेक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को यात्रा की सुचारू व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आस्था के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश दिए।
READ MOREउत्तर प्रदेश कैडर के 2011 बैच के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी स्वप्निल मंमगाईं को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) पद पर नियुक्त किया है। आईपीएस अधिकारी स्वप्निल मंमगाईं की यह नियुक्ति प्रतिनियुक्ति आधार पर की गई है, जो कि अधिकतम पांच वर्षों की अवधि के लिए होगी या जब तक अगले आदेश रहेगी।
READ MOREसीएम योगी आदित्यनाथ ने आंजनेय सेवा संस्थान में आयोजित 13वें सरयू जयंती महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में अयोध्या के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित करते हुए नदियों के पुनर्जनन, विकास कार्यों और उत्तर प्रदेश की नई पहचान पर प्रकाश डाला।
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महाविद्यालय के विकसित भारत संकल्प क्लब द्वारा बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर तीन विशेष कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। पूरे महाविद्यालय परिसर में सकारात्मक, उत्साहपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण देखने को मिला।
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हिमालय की ऊंचाइयों पर जब बर्फ पिघलती है, तो सिर्फ ग्लेशियर ही नहीं बदलते, हमारी सच्चाई भी सामने आती है। उन दुर्गम पहाड़ों पर, जहां शुद्धता और शांति का वास माना जाता है, वहीं इंसान ने अपने पीछे कचरे के ढेर छोड़ दिए हैं। प्लास्टिक की बोतलें, रैपर, टूटी चप्पलें और इस्तेमाल किए गए टेंट, यह सब किसी आपदा के बाद नहीं, बल्कि हमारे ‘घूमने’ के बाद बचा हुआ सच है।
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