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देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों की बहादुरी की कहानियां केवल इतिहास का हिस्सा नहीं होतीं, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, कर्तव्य और बलिदान की मिसाल बन जाती हैं। ऐसे ही एक अमर योद्धा थे कैप्टन दीपक सिंह, जिन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान अपने साथी सैनिक की जान बचाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी अदम्य वीरता और निस्वार्थ कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।
READ MOREविश्व प्रसिद्ध चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ मंदिर के कपाट सोमवार को शुभ मुहूर्त में पूर्ण वैदिक रीति-रिवाजों, मंत्रोच्चारण एवं धार्मिक परंपराओं के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाटोद्घाटन के इस भव्य और आध्यात्मिक समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत, तीर्थ पुरोहित और स्थानीय लोग शामिल हुए। कपाट खुलते ही पूरा रुद्रनाथ धाम “हर-हर महादेव” और “जय बाबा रुद्रनाथ” के जयघोषों से गूंज उठा तथा वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
READ MOREभारत भूमि सदैव वीरों की जन्मस्थली रही है। इसी पावन धरती ने अनेक ऐसे रणबांकुरे दिए, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हीं अमर वीरों में एक नाम है मोहन नाथ गोस्वामी का, जिनकी बहादुरी, समर्पण और राष्ट्रप्रेम आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उत्तराखंड की वीरभूमि में जन्मे मोहन नाथ गोस्वामी ने अपने अदम्य साहस से यह साबित कर दिया कि भारतीय सैनिक केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं करता, बल्कि देश के सम्मान के लिए अंतिम सांस तक लड़ता है।
READ MOREउत्तराखंड के दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऊंचे पहाड़, कठिन रास्ते और सीमित संसाधनों के बीच यदि कोई वर्षों तक निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करता है, तो वह वास्तव में सम्मान का पात्र होता है। ऐसी ही प्रेरणादायी शख्सियत हैं उत्तरकाशी जनपद की सुश्री पूजा परमार राणा, जिन्हें वर्ष 2026 के राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया।
READ MOREभारतीय सेना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च मार्ग है। इसी भावना को अपने साहस, अनुशासन और समर्पण से जीवंत करने वाले वीर सैनिक हैं आदर्श नेगी। गढ़वाल राइफल्स के इस जांबाज़ जवान ने अपने कर्तव्य पालन और वीरता से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है।
READ MOREउत्तराखंड की पावन धरती ने अनेक वीर सपूतों को जन्म दिया है, जिनमें राइफलमैन जसवंत सिंह रावत का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। 19 अगस्त 1941 को पौड़ी गढ़वाल जिले के बड़यूं गांव में जन्मे जसवंत सिंह बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे। मात्र 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने सेना में भर्ती होने की कोशिश की, लेकिन कम उम्र के कारण उन्हें वापस भेज दिया गया। हालांकि उनका जुनून कम नहीं हुआ और अंततः 19 अगस्त 1960 को वे भारतीय सेना में शामिल हो गए। 14 सितंबर 1961 को उनकी ट्रेनिंग पूरी हुई और जल्द ही उन्हें देश सेवा का मौका मिल गया।
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उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक ऐपण कला अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी अलग पहचान बना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को उत्तराखंड की प्रसिद्ध ऐपण कला पर आधारित भगवान शिव की कलाकृति भेंट कर दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने का संदेश दिया। इस विशेष उपहार ने न केवल उत्तराखंड की पारंपरिक लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को भी विश्व पटल पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
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उत्तराखंड के चमोली जिले की बेटी मुन्नी देवी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। थाईलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में मुन्नी देवी ने अपनी अद्भुत ताकत, मेहनत और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए स्वर्णिम सफलता हासिल की। उनकी इस उपलब्धि से पूरे जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। खेल प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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