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भारत भूमि सदैव वीरों की जन्मस्थली रही है। इसी पावन धरती ने अनेक ऐसे रणबांकुरे दिए, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हीं अमर वीरों में एक नाम है मोहन नाथ गोस्वामी का, जिनकी बहादुरी, समर्पण और राष्ट्रप्रेम आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उत्तराखंड की वीरभूमि में जन्मे मोहन नाथ गोस्वामी ने अपने अदम्य साहस से यह साबित कर दिया कि भारतीय सैनिक केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं करता, बल्कि देश के सम्मान के लिए अंतिम सांस तक लड़ता है।
READ MOREउत्तराखंड के दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऊंचे पहाड़, कठिन रास्ते और सीमित संसाधनों के बीच यदि कोई वर्षों तक निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करता है, तो वह वास्तव में सम्मान का पात्र होता है। ऐसी ही प्रेरणादायी शख्सियत हैं उत्तरकाशी जनपद की सुश्री पूजा परमार राणा, जिन्हें वर्ष 2026 के राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया।
READ MOREभारतीय सेना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च मार्ग है। इसी भावना को अपने साहस, अनुशासन और समर्पण से जीवंत करने वाले वीर सैनिक हैं आदर्श नेगी। गढ़वाल राइफल्स के इस जांबाज़ जवान ने अपने कर्तव्य पालन और वीरता से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है।
READ MOREउत्तराखंड की पावन धरती ने अनेक वीर सपूतों को जन्म दिया है, जिनमें राइफलमैन जसवंत सिंह रावत का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। 19 अगस्त 1941 को पौड़ी गढ़वाल जिले के बड़यूं गांव में जन्मे जसवंत सिंह बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे। मात्र 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने सेना में भर्ती होने की कोशिश की, लेकिन कम उम्र के कारण उन्हें वापस भेज दिया गया। हालांकि उनका जुनून कम नहीं हुआ और अंततः 19 अगस्त 1960 को वे भारतीय सेना में शामिल हो गए। 14 सितंबर 1961 को उनकी ट्रेनिंग पूरी हुई और जल्द ही उन्हें देश सेवा का मौका मिल गया।
READ MOREभारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनेक वीरों ने अपने अदम्य साहस और त्याग से इतिहास रचा, उन्हीं महान विभूतियों में एक नाम है वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का। उनका जीवन केवल एक सैनिक का नहीं, बल्कि एक सच्चे मानवतावादी और क्रांतिकारी का प्रतीक है, जिन्होंने अपने सिद्धांतों के लिए हर कठिनाई का सामना किया।
READ MOREउत्तराखंड में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए आज से ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य के पर्यटन विभाग ने यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। श्रद्धालु सुबह 7 बजे से आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।
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उत्तराखंड के पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन के बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने गांव में रहकर ही सफलता की नई मिसाल कायम की है। इन्हीं में एक नाम है कमल गिरी का, जिन्होंने मेहनत, लगन और आधुनिक तकनीक के दम पर खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया। कमल गिरी आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जो रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं।
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सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ कमेंडेशन मेडल और प्रशंसा पत्र से किया सम्मानित, आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को रक्षा क्षेत्र में उनकी निर्भीक पत्रकारिता के लिए चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया गया। सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित होने वाले ये देश के एक मात्र रक्षा पत्रकार हैं। सीडीएस ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान ने ३० मई को सेवानिवृत होने से पूर्व कई तीनों सेनाओं के कई अधिकारियों और जवानों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने सेनाओं के अलावा समाज के अलग अलग क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य करने वाले कुछ चुनिंदा लोगों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। मनजीत नेगी उनमें से एक हैं। मनजीत नेगी पत्रकारिता के क्षेत्र में। पिछले 25 साल से कार्यरत हैं।
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