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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि वे न केवल एक कुशल प्रशासक हैं, बल्कि सनातन धर्म के सच्चे रक्षक भी हैं। कांवड़ यात्रा जैसे विशाल धार्मिक आयोजन से ठीक पहले मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेशभर में सक्रिय ढोंगी, फर्जी और छद्म भेषधारियों के विरुद्ध ‘ऑपरेशन कालनेमि’ शुरू करने के निर्देश देकर अपनी धर्मरक्षक छवि को और भी मजबूत कर दिया है।
READ MOREइस नीति के माध्यम से भू-तापीय ऊर्जा के माध्यम से राज्य में कार्बन उत्सर्जन को कम करने और राज्य के दीर्घकालिक पर्यावरणीय व ऊर्जा लक्ष्यों में योगदान के माध्यम से राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना है। यह नीति राज्य के सभी भू-तापीय परियोजनाओं पर लागू होगी। इसका कार्यान्वयन राज्य के ऊर्जा विभाग द्वारा उरेडा, और यू.जे.वी.एन.एल के सहयोग से किया जाएगा।
READ MOREभीड़ प्रबंधन में वॉलंटियर्स की मदद लेने, सीसीटीवी व ड्रोन से निरंतर निगरानी और अभिसूचना तंत्र को सक्रिय रखने पर बल दिया। बेहतर यातायात व्यवस्था अलग से प्लान बनाकर उसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए ताकि श्रद्धालुओं को असुविधा न हो। आतंकवादी खतरों को मद्देनजर रखते हुए एटीएस और विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
READ MOREग्रामीणों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। अतिवृष्टि से दो गौशाला को नुकसान पहुंचा। जिसका संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी संदीप तिवारी के निर्देश पर तहसील प्रशासन की टीम घटनास्थल का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने प्रभावितों को तत्काल राहत देने के साथ ही ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के आदेश दिए हैं।
READ MOREप्रमुख सचिव सुधांशु ने बताया कि आमजन की शिकायतों को देखते हुए अब रजिस्ट्रार कार्यालयों में तकनीकी अपग्रेडेशन के साथ-साथ विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यदि भविष्य में कोई गड़बड़ी होती है, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही भी तय हो।
READ MOREउत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्रैकिंग और साहसिक खेलों के लिए नए स्थल विकसित करने का निर्देश राज्य की 25वीं वर्षगांठ पर दिया था। इसके बाद राज्य की उन चोटियों पर एसडीआरएफ की टीम जा रही है, जहां अभी तक मानवीय गतिविधियां नहीं हुई हैं।
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उत्तराखंड को लंबे समय से देश की “वीरभूमि” और “सैनिक प्रदेश” के रूप में जाना जाता है। राज्य के लगभग प्रत्येक पाँचवें परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना, अर्धसैनिक बलों या पूर्व सैनिक समुदाय से जुड़ा हुआ है। ऐसे प्रदेश में सैनिकों के सम्मान से जुड़ी किसी भी पहल का महत्व केवल प्रशासनिक या राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक भी होता है। यही कारण है कि देहरादून में निर्मित “सैन्य धाम” परियोजना आरम्भ से ही चर्चा और विवाद दोनों का विषय बनी हुई है।
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विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर 127 इन्फैंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी) ईको गढ़वाल राइफल्स, जिसे “गढ़वाल ग्रीनर्स” के नाम से जाना जाता है, द्वारा उत्तराखण्ड में पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से 02 से 05 जून तक पर्यावरण सप्ताह का व्यापक आयोजन किया गया। “भागीदारी और जिम्मेदारी” विषय पर आधारित इस अभियान के अंतर्गत देहरादून, सहिया और कस्याली सहित विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अनेक गतिविधियों का सफल संचालन किया गया।
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