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श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही चारों धामों के कपाट शीतकाल के छह माह के लिए बंद हो गए हैं। प्राकृतिक आपदाओं के चलते कई दिनों तक यात्रा बाधित होने के बावजूद इस वर्ष भी यात्रा ने नया रिकॉर्ड बनाया है। इस वर्ष 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने चार धाम के दर्शन किए हैं। बीते वर्ष के मुकाबले इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या 04 लाख 35 हजार 901 अधिक रही है।
READ MOREदिवाकर भट्ट सिर्फ एक नेता नहीं थे, वे उत्तराखंड आंदोलन की धड़कन थे। 1994 से लेकर राज्य बनने तक हर मोर्चे पर उनका चेहरा जिद, साहस और जनता की बेबसी के बीच खड़ा दिखा। भीड़, लाठीचार्ज, गिरफ्तारी, गोली का आदेश सबका सामना करते हुए उन्होंने पहाड़ की आवाज़ दिल्ली तक पहुंचाई। UKD के माध्यम से उन्होंने पहाड़ की राजनीति को नई पहचान दी। उनका जाना पहाड़ की अस्मिता का सबसे बड़ा नुकसान है।
READ MOREउत्तराखंड से पलायन का अध्ययन 1970 के दशक से हो रहा है, लेकिन यह मुद्दा 1990 के दशक में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के समय व्यापक रूप से सार्वजनिक चर्चा में आया और राज्य के गठन 2000 के बाद भी यह प्रासंगिक बना हुआ है।
READ MOREउत्तराखंड पेयजल निगम में 2660 करोड़ की अनियमितताओं का खुलासा सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि व्यवस्था की खोखली पड़ चुकी रीढ़ का आईना है। RTI एक्टिविस्ट व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने सीएजी रिपोर्टों और वर्षों तक न हुए ऑडिट के आधार पर जो तथ्य सामने रखे, वे बताते हैं कि यह महज “लापरवाही” नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार है।
READ MOREइस अक्टूबर, नंदाकिनी घाटी में हुई तबाही को भूविज्ञान विशेषज्ञ प्रो. महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट ने बेहद नज़दीक से देखा। दशकों से पहाड़ों को पढ़ने-समझने वाले बिष्ट बताते हैं कि यह आपदा प्रकृति के क्रोध से नहीं, बल्कि हमारी अनियंत्रित बसावट, लालच और वैज्ञानिक चेतावनियों की अनदेखी का नतीजा है। घाटी बार-बार संकेत देती है, क्या हम सुनेंगे?
READ MOREउत्तराखंड सरकार राज्य में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने में लगी हुई है। इसी के तहत राज्य में प्रोफेशनल एवं प्रमाणित रिवर गाइड तैयार करना, युवाओं को स्थायी एवं सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना और स्थानीय स्तर पर स्व-रोज़गार और छोटे उद्यमों को बढ़ावा देना है।
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सावन के पावन महीने में शिवभक्तों की आस्था के प्रमुख केंद्र नीलकंठ श्रावण कांवड़ मेले को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम बनाने के लिए इस बार व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पूरे मेला क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी करीब 1,200 पुलिस, पीएसी, होमगार्ड और पीआरडी जवानों के कंधों पर होगी। पुलिस का दावा है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी टीमें तैयार रहेंगी।
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उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए बड़े स्तर पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। प्रदेश में शिक्षकों के 1,500 से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। इनमें प्रवक्ता के 808 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पहले से चल रही है, जबकि प्रारंभिक शिक्षा में सहायक अध्यापक के 250 से अधिक पदों पर भर्ती के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इसके अलावा सहायक अध्यापक एलटी के 450 से अधिक पद भी रिक्त हैं। इन पदों को भरने के लिए जल्द ही उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
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