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उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में बसंत पंचमी के आते ही होल्यारों का उत्साह देखने योग्य होता है। महाशिव रात्रि से खड़ी होली शुरू हो जाती है। रंग एकादशी के दिन चीर बांधी जाती है। एकादशी से होली का त्योहार पूरे सवाब पर चढ़ जाता है। महिला व पुरुष समूह कदमताल करते गीतों में झूमते नजर आते हैं।
READ MOREहेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (एचएनबीजीयू) का 12वां दीक्षांत समारोह 24 मार्च 2026 को आयोजित किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह भव्य समारोह विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमथन ऑडिटोरियम में संपन्न होगा।
READ MOREउत्तराखंड के चमोली जनपद स्थित विश्व प्रसिद्ध नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान से इस वर्ष एक बेहद सुखद और उत्साहजनक खबर सामने आई है। जोशीमठ (ज्योतिर्मठ) क्षेत्र के अंतर्गत जोशीधार इलाके में दुर्लभ प्रजाति के स्टेपी ईगल का पहली बार स्पष्ट रूप से कैमरे में कैद होना वन विभाग, पक्षी विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
READ MOREउत्तराखंड के पौड़ी जनपद के ग्राम नौगांव आसूई (ब्लॉक कल्जीखाल) के वीर सपूत अग्निवीर सचिन सिंह के केरल में ड्यूटी के दौरान शहीद होने की दुखद खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। कम उम्र में मातृभूमि की सेवा करते हुए उनके सर्वोच्च बलिदान ने हर आंख को नम कर दिया है।
READ MOREचारधाम यात्रा को लेकर राज्य सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। 22 अप्रैल से केदारनाथ धाम की यात्रा प्रारंभ हो जाएगी। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार घोड़ा-खच्चरों का डिजिटल डाटा तैयार किया जा रहा है, ताकि यात्रा पर आने वाले यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
READ MOREगोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनमोहन सिंह चौहान को छह माह का सेवा-विस्तार प्रदान किया गया है।
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उत्तराखंड में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए आज से ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य के पर्यटन विभाग ने यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। श्रद्धालु सुबह 7 बजे से आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।
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गढ़वाल और कुमाऊँ में होली का उल्लास अपने चरम पर पहुँच चुका है। वास्तविक होली से एक दिन पहले ही पहाड़ के गाँवों में उत्सव का रंग साफ दिखाई दे रहा है। शाम ढलते ही चौपालों और मंदिर प्रांगणों में लोग एकत्रित हो रहे हैं और बैठक होली की मधुर स्वर लहरियाँ गूंज रही हैं। ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की संगत में पारंपरिक होली गीत गाए जा रहे हैं।
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