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गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की प्रेरणा से आयोजित चार-दिवसीय उत्तराखंड राज्य अंतर-विश्वविद्यालय खेल महोत्सव का गरिमामय एवं ऐतिहासिक समापन हुआ।
READ MOREएयर वाइस मार्शल राजेश भंडारी का देश की सर्वोच्च रक्षा सेवा में योगदान अत्यंत सराहनीय रहा है। उनका समर्पण, नेतृत्व क्षमता और उत्कृष्ट सेवाएं क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
READ MOREदक्षिण एशिया के सबसे बड़े पर्यटन मेले SATTE 2026 में उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) दोनों निगमों कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) और गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) के साथ संयुक्त रूप से अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
READ MOREकाण्डा ग्राम पंचायत की शांत वादियों में बसा एक छोटा सा पहाड़ी गांव आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुका है। यह गांव पोखरी विकासखंड के अंतर्गत आता है, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं चुनौतियों के बीच कमल रावत और उनकी पत्नी रेखा देवी ने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प से एक नई कहानी लिखी है।
READ MOREआस्था, परंपरा और सांस्कृतिक वैभव के अद्वितीय संगम का प्रतीक 2027 का कुंभ हरिद्वार में 14 जनवरी से 20 अप्रैल 2027 तक आयोजित होगा। यह आयोजन अर्धकुंभ के रूप में होगा, किंतु राज्य और केंद्र सरकार ने इसे भव्य और दिव्य स्वरूप देने का संकल्प लिया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित संख्या को देखते हुए तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं।
READ MOREगोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के स्टीवेंसन स्टेडियम में उत्तराखंड राज्य अंतर-विश्वविद्यालय खेल एवं क्रीड़ा महोत्सव 2025-26 का उद्घाटन मुख्य अतिथि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह द्वारा किया गया। महोत्सव में प्रदेश के 10 विश्वविद्यालयों से लगभग 722 विद्यार्थी प्रतिभाग कर रहे हैं।
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उत्तराखंड में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए आज से ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य के पर्यटन विभाग ने यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। श्रद्धालु सुबह 7 बजे से आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।
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गढ़वाल और कुमाऊँ में होली का उल्लास अपने चरम पर पहुँच चुका है। वास्तविक होली से एक दिन पहले ही पहाड़ के गाँवों में उत्सव का रंग साफ दिखाई दे रहा है। शाम ढलते ही चौपालों और मंदिर प्रांगणों में लोग एकत्रित हो रहे हैं और बैठक होली की मधुर स्वर लहरियाँ गूंज रही हैं। ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की संगत में पारंपरिक होली गीत गाए जा रहे हैं।
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