सीएम रेखा गुप्ता ने भगवान केदारनाथ के किए दर्शन
- उत्तराखंड न्यूज़, ताज़ा ख़बर, रुद्रप्रयाग
- June 2, 2025

उत्तराखंड के पहाड़ों में जैसे ही गर्मियों की धूप तेज होने लगती है और जंगलों में लाल-लाल रसीले काफल पकने लगते हैं, वैसे ही वादियों में एक मधुर आवाज गूंजने लगती है। “काफल पाको… मैं नि चाख्यो…”यह केवल एक पक्षी की आवाज नहीं, बल्कि पहाड़ की लोकसंस्कृति, प्रकृति और भावनाओं से जुड़ी एक जीवंत धुन है। पहाड़ के लोग मानते हैं कि यह चिड़िया स्वयं आकर लोगों को बताती है कि अब जंगलों में काफल पक चुके हैं। इसलिए इसे प्यार से “काफल-पाको चिड़िया” कहा जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे इंडियन कुक्कू कहा जाता है, जिसका वैज्ञानिक नाम कुकुलस माइक्रोप्रोटेरस है।
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हिमालय की ऊंचाइयों पर जब सैकड़ों धावक बर्फीली चोटियों और गहरी घाटियों के बीच दौड़ेंगे, तब यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं होगी- यह सीमांत भारत के आत्मविश्वास, प्रकृति के वैभव और उत्तराखंड की असीम संभावनाओं का जीवंत उत्सव होगा।
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जिसे वन्यजीवों और जैव विविधता का समृद्ध प्रदेश माना जाता है, वहीं अब बाघ और तेंदुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य के जंगलों में बीते तीन वर्षों के दौरान 345 बाघ और तेंदुओं की मौत ने वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण तंत्र की कार्यप्रणाली पर चिंता बढ़ा दी है। अवैध शिकार, सड़क और रेल दुर्घटनाएं, आपसी संघर्ष तथा प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ वन्यजीव अंगों की तस्करी भी इन मौतों का बड़ा कारण बन रही है।
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पंच केदारों में द्वितीय केदार के रूप में प्रसिद्ध भगवान मद्महेश्वर मंदिर के कपाट बृहस्पतिवार को वैदिक मंत्रोच्चारण, धार्मिक अनुष्ठानों और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयकारों के बीच श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाटोद्घाटन के इस पावन अवसर का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचे। करीब 1135 श्रद्धालुओं ने भगवान मद्महेश्वर के प्रथम दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
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