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निकटतम स्कूल बंद होने से रोज जान जोखिम में डालकर पढ़ने जाती हैं पैनल गांव की छात्राएं, पहाड़ों में शिक्षा हासिल करना आज भी कई बच्चों के लिए किसी संघर्ष से कम नहीं है। विकासखंड जयहरीखाल के पैनल गांव की बेटियां इसका जीवंत उदाहरण बन चुकी हैं। यहां की छात्राएं प्रतिदिन 28 किलोमीटर पैदल चलकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। गांव से 14 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय इंटर कॉलेज मठाली तक पहुंचने के लिए उन्हें दुर्गम पहाड़ी रास्तों, खड़ी चढ़ाइयों और घने जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है। शिक्षा के लिए उनका यह संघर्ष अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
READ MORE12 से अधिक लोगों से पूछताछ, तीसरे नामजद आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस, जिले के सल्ली क्षेत्र में नाबालिग छात्रा से जुड़ा मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने अब इसकी जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन कर दिया है। पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सके।
READ MOREमां सिर्फ जन्म देने वाली नहीं होती, वह अपने बच्चों के हर दर्द को खुद में समेट लेने वाली शक्ति भी होती है। इसका जीता-जागता उदाहरण हैं 80 वर्षीय नीलम ओबराय, जो पिछले 31 वर्षों से अपने बेटे अमित ओबराय की सेवा में दिन-रात जुटी हुई हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी उनकी आंखों में बस एक ही सपना है उनका बेटा एक बार फिर अपने पैरों पर खड़ा हो सके और खुली दुनिया को देख सके।
READ MOREबेटे विदेशों में, लेकिन गांव की धड़कनों में आज भी जिंदा है अपनापन, पहाड़ के छोटे-से गांव गौना की सुबह अब सिर्फ पक्षियों की चहचहाहट से नहीं होती, बल्कि मोबाइल की घंटियों से भी शुरू होती है। हर दिन एक कॉल का इंतजार यहां की माताओं की जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा बन चुका है। कोई बेटा दुबई के होटल में नौकरी कर रहा है, कोई बंगलूरू की चमकती दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है तो कोई जर्मनी में अपने सपनों को आकार दे रहा है। लेकिन इन सबके बीच गांव की माताएं आज भी अपने आंगन, खेत-खलिहानों और घर की चौखट से जुड़ी हुई हैं।
READ MOREउत्तराखंड के इतिहास में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। जिस सपने को पहाड़ों ने 141 वर्षों तक अपनी आंखों में संजोकर रखा, वह अब धीरे-धीरे हकीकत बनने लगा है। सामरिक, धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। आगामी 20 मई से इस परियोजना के तहत पहली बार ऋषिकेश से आगे पहाड़ों में रेलवे ट्रैक बिछाने का कार्य शुरू होने जा रहा है।
READ MOREपौड़ी जिले के बमठी गांव में आखिरकार उस गुलदार का आतंक समाप्त हो गया, जिसने पिछले कई दिनों से पूरे इलाके में भय का माहौल बना रखा था। वन विभाग की टीम ने देर रात कार्रवाई करते हुए गुलदार को मार गिराया। इस घटना के बाद गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीण लंबे समय से डर और असुरक्षा के माहौल में जी रहे थे।
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नैनीताल से घूमकर वापस लौट रहे सैलानियों की टवेरा टैक्सी गुरुवार को ज्योलीकोट के नंबर-1 बैंड के पास अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और राहगीरों ने तुरंत पुलिस व एसडीआरएफ को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। समय रहते चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के चलते सभी घायल सैलानियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
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जिले में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए खुले में कूड़ा जलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब ऐसे मामलों में 5 हजार रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही यदि कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था में अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है तो उनकी जवाबदेही भी तय की जाएगी।
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